नवलगढ़ इंजेक्शन चोरी कांड में नया मोड़:आरोपी छात्रा के परिजनों की निष्पक्ष जांच मांग, डॉक्टर रात को बुलाती थीं, मना करने पर बैग में प्लांट किए इंजेक्शन
नवलगढ़ इंजेक्शन चोरी कांड में नया मोड़:आरोपी छात्रा के परिजनों की निष्पक्ष जांच मांग, डॉक्टर रात को बुलाती थीं, मना करने पर बैग में प्लांट किए इंजेक्शन
नवलगढ़ : नवलगढ़ जिला अस्पताल में हुए बहुचर्चित ‘ह्यूमन एल्ब्यूमिन’ इंजेक्शन चोरी प्रकरण ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जिस छात्रा दीपाली कुमावत को 12 लाख रुपये के इंजेक्शन घोटाले की मुख्य कड़ी मानकर FIR दर्ज करवाई गई थी, उसने अब अस्पताल प्रशासन के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। छात्रा के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक (SP) से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच और अस्पताल के ‘नेक्सस’ के पर्दाफाश की मांग की है। छात्रा ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए परिवाद में डॉ. अनीता बोस और नर्सिंग ऑफिसर पर उसे जानबूझकर फंसाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

छात्रा का दावा है कि उसकी इंटर्नशिप खत्म होने के बावजूद उसे डॉक्टर द्वारा अनुचित दबाव डालकर रात की ड्यूटी पर बुलाया जाता था।
छात्रा ने फरवरी और मार्च 2026 के व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड पेश किए हैं।
छात्रा का कहना है कि उसे मात्र 100 रुपये प्रति रात के लालच में अवैध रूप से काम पर रखा गया था, ताकि अस्पताल के भीतर चल रही संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके।
षड्यंत्र के तहत बनाया गया वीडियो
दीपाली ने 1 अप्रैल की घटना का सिलसिलेवार विवरण देते हुए बताया कि नर्सिंग ऑफिसर ने स्टाफ रूम की अलमारी से इंजेक्शन निकालकर चुपके से उसके बैग में रखे थे। छात्रा के अनुसार, जैसे ही इंजेक्शन रखे गए, डॉ. अनीता बोस वहां पहुंचीं और मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया, ताकि इसे रंगे हाथों पकड़ी गई चोरी का रूप दिया जा सके।
ज्ञापन में छात्रा ने बताया कि उसके बैग में इंजेक्शन प्लांट किए गए थे। यह सब इसलिए किया गया ताकि अस्पताल के स्टॉक से गायब हुए 323 इंजेक्शन्स का दोष मुझ पर मढ़ा जा सके और असली गुनहगार बच सकें।
गहराता जा रहा है 12 लाख के इंजेक्शन्स का रहस्य
अस्पताल की आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक साल में 894 इंजेक्शन आए थे, जिनमें से 323 गायब हैं। छात्रा ने सवाल उठाया है।
ये हैं मांगें
परिजनों ने मांग की है कि जांच नवलगढ़ पुलिस के बजाय किसी उच्चाधिकारी या विशेष जांच दल (SIT) से करवाई जाए। जब्त किए गए मोबाइल और व्हाट्सएप चैट की फॉरेंसिक जांच की जाए ताकि डॉक्टर और छात्रा के बीच के संवाद की सच्चाई सामने आ सके। अस्पताल के पिछले एक साल के स्टॉक रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच हो।

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