[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

मासूमों पर कुत्तों का कहर: फतेहपुर में खूनी संघर्ष, प्रशासन की चुप्पी से सुलग रहा है आक्रोश


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़फतेहपुरराजस्थानराज्यसीकर

मासूमों पर कुत्तों का कहर: फतेहपुर में खूनी संघर्ष, प्रशासन की चुप्पी से सुलग रहा है आक्रोश

मासूमों पर कुत्तों का कहर: फतेहपुर में खूनी संघर्ष, प्रशासन की चुप्पी से सुलग रहा है आक्रोश

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान

फतेहपुर : फतेहपुर क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक अब जानलेवा होता जा रहा है। प्रशासन की ‘मौन साधना’ के बीच खूंखार कुत्तों ने एक बार फिर खूनी खेल खेलते हुए 20 से अधिक मासूमों और ग्रामीणों को अपना शिकार बनाया है। मरडाटू बड़ी से शुरू हुआ यह आतंक का सिलसिला मरडाटू छोटी, कारंगा छोटा और कारंगा बड़ा गांव तक फैल गया है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

​गांव-गांव फैला खौफ, सड़कों पर निकलना दुश्वार

​ताजा घटनाक्रम में कुत्तों के झुंड ने राह चलते बच्चों और बुजुर्गों महिलाओं पर अचानक हमला कर दिया। घायलों की चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने जैसे-तैसे उन्हें कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया। सभी लहूलुहान घायलों को आनन-फानन में धानुका अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति इतनी भयावह है कि अब लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी थर-थर कांप रहे हैं।

पहले देखे फोटो 

​प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

​यह कोई पहली घटना नहीं है। फतेहपुर में कुत्तों के हमले पहले भी होते रहे हैं, कई बच्चे घायल हुए हैं। लेकिन नगर पालिका और संबंधित प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है? दावों और वादों के बीच धरातल पर न तो नसबंदी का काम दिख रहा है और न ही इन हिंसक कुत्तों को पकड़ने की कोई ठोस योजना।

​जनता जान ना चाहती हैं।
हमारी सुरक्षा का जिम्मेदार कौन हैं?
​मरडाटू और कारंगा क्षेत्र के ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इन ‘आदमखोर’ होते कुत्तों पर नकेल नहीं कसी, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। अस्पताल में भर्ती घायलों के परिजनों की आंखों में आंसू और प्रशासन के प्रति गुस्सा साफ देखा जा सकता है।

​”क्या प्रशासन की चुप्पी किसी मासूम की बलि मांग रही है? आखिर कब तक फतेहपुर की जनता इन खूंखार कुत्तों का शिकार होती रहेगी?”

Related Articles