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मानपुर में फ्रंटलाइन वर्कर्स का सम्मान, सीएसआर पहल से ग्रामीण स्वास्थ्य को मिली नई ताकत


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मानपुर में फ्रंटलाइन वर्कर्स का सम्मान, सीएसआर पहल से ग्रामीण स्वास्थ्य को मिली नई ताकत

मानपुर में फ्रंटलाइन वर्कर्स का सम्मान, सीएसआर पहल से ग्रामीण स्वास्थ्य को मिली नई ताकत

चित्तौड़गढ़ : ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा देने की पहल करते हुए बिरला कॉरपोरेशन लिमिटेड की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के अंतर्गत मानपुर गांव में फ्रंटलाइन वर्कर्स सम्मान एवं प्रेरणा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यदायी संस्था पैक्स (एनजीओ) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, एएनएम तथा आशा सहयोगिनियों के समर्पण और सेवा भावना को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती, मातृ-शिशु पोषण सुधार और सामुदायिक जागरूकता को लेकर एक सशक्त संदेश भी बनकर सामने आया।

वक्ताओं ने कहा कि फ्रंटलाइन कर्मी ही सरकार की योजनाओं और आमजन के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिनकी मेहनत से गांवों में स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार संभव हो पा रहा है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ मनीष मेघवाल, कार्यक्रम अधिकारी समता भटनागर, राकेश, कंपनी की सीएसआर प्रमुख पुष्पांजलि यादव, शिवगोविंद सहित संस्था की टीम और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सीएसआर प्रमुख पुष्पांजलि यादव ने कहा कि ग्रामीण विकास तभी संभव है जब स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा तीनों क्षेत्रों में समान रूप से काम किया जाए। उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर्स को समाज परिवर्तन के वास्तविक नायक” बताते हुए भविष्य में भी हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

सीडीपीओ मनीष मेघवाल ने कंपनी की सीएसआर पहल की सराहना करते हुए कहा कि विभाग और सामाजिक संस्थाओं के समन्वय से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आसान हो जाता है। उन्होंने फ्रंटलाइन कर्मियों की प्रतिबद्धता को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उनका कार्य केवल नौकरी नहीं बल्कि सामाजिक सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है। कार्यक्रम अधिकारी समता भटनागर ने बताया कि सीएसआर कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और बाल विकास से जुड़ी कई जमीनी चुनौतियों को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र के कर्मियों की निरंतर मेहनत और सामुदायिक भागीदारी को दिया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स को सम्मानित कर उपहार भेंट किए गए। साथ ही शिक्षा, आजीविका संवर्धन और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रयास करने वाले युवाओं को भी मंच पर सम्मान मिला, जिससे कार्यक्रम में प्रेरणा और उत्साह का वातावरण बना रहा।

ग्रामीणों ने इस पहल को सामाजिक सरोकार से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल कर्मियों का मनोबल बढ़ाते हैं बल्कि समाज में सेवा भावना और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरपोरेट, प्रशासन और समुदाय के त्रिस्तरीय सहयोग का यह मॉडल ग्रामीण विकास के लिए प्रभावी उदाहरण साबित हो सकता है। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के समन्वय का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

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