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झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज में 6-डॉक्टरों के पदनाम हटाने पर विवाद:बिना नोटिस कार्रवाई करने का आरोप, कई विभागों में फैकल्टी की संख्या शून्य हुई


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झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज में 6-डॉक्टरों के पदनाम हटाने पर विवाद:बिना नोटिस कार्रवाई करने का आरोप, कई विभागों में फैकल्टी की संख्या शून्य हुई

झुंझुनूं मेडिकल कॉलेज में 6-डॉक्टरों के पदनाम हटाने पर विवाद:बिना नोटिस कार्रवाई करने का आरोप, कई विभागों में फैकल्टी की संख्या शून्य हुई

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) झुंझुनूं में प्रिंसिपल द्वारा पिछले 6 महीनों में 6 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदनाम (Designation) विलोपित करने का मामला विवादों में आ गया है। चिकित्सकों के संगठन अरिसदा (ARISDA) ने इसे प्रिंसिपल की ‘तानाशाही’ और ‘द्वेषपूर्ण’ कार्रवाई बताते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। चिकित्सकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पदनाम बहाल नहीं किए गए और प्रिंसिपल पर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रिंसिपल ने राजस्थान सेवा नियमों (RSR) और स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया है। किसी भी कार्मिक पर कार्रवाई से पूर्व नोटिस देना, जवाब सुनना और सक्षम स्तर (सरकार) से अनुमोदन लेना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें न कोई नोटिस, न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया। त्यागपत्र दे चुके और सेवानिवृत्त हो चुके चिकित्सकों के पदनाम अब तक विलोपित नहीं हुए, जबकि निरंतर सेवा दे रहे कर्मठ डॉक्टरों को निशाना बनाया गया। बिना पीएमओ (PMO) की जानकारी और बिना प्रशासनिक स्वीकृति के एकतरफा आदेश जारी किए गए।

विभागों में फैकल्टी की संख्या शून्य हुई

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में केवल पदनामित (Designated) चिकित्सक ही कार्यरत थे। उनके पदनाम विलोपित होने से अब इन विभागों में फैकल्टी की संख्या ‘शून्य’ हो गई है।

दरअसल, पिछले 13 दिनों से राजमेस (RajMES) द्वारा सीधे पदस्थापित शिक्षक आपातकालीन सेवाओं (Emergency Duty) का बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में भी ये पदनामित चिकित्सक ही ओपीडी, आईपीडी, पोस्टमार्टम, जेल ड्यूटी और राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संचालन कर आमजन को सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके साथ ‘बर्बरतापूर्ण’ व्यवहार किया जा रहा है।

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