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इच्छेश्वर महादेव मंदिर: शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्वतः प्रकट हुईं:महाशिवरात्रि पर उमड़ेगी भीड़, खेतड़ी रियासत से भी पुराना है मंदिर


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इच्छेश्वर महादेव मंदिर: शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्वतः प्रकट हुईं:महाशिवरात्रि पर उमड़ेगी भीड़, खेतड़ी रियासत से भी पुराना है मंदिर

इच्छेश्वर महादेव मंदिर: शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्वतः प्रकट हुईं:महाशिवरात्रि पर उमड़ेगी भीड़, खेतड़ी रियासत से भी पुराना है मंदिर

गुढ़ागौड़जी : गुढ़ागौड़जी कस्बे की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन इच्छेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है, जिसके कारण इस मंदिर को इच्छेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषता के कारण क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं। बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व ये प्रतिमाएं पहाड़ को चीरकर स्वतः प्रकट हुई थीं। दोनों प्रतिमाएं एक-दूसरे से सटी हुई हैं, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

इतिहास के अनुसार, यह मंदिर खेतड़ी रियासत से भी प्राचीन माना जाता है। लोककथाओं के मुताबिक, उस समय के राजा भगवान शिव के परम भक्त थे और नियमित रूप से यहां पूजा-अर्चना करने आते थे। एक बार युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब वे मंदिर पहुंचे, तो सीढ़ियां चढ़ने की स्थिति में नहीं थे। तभी भगवान शिव साक्षात प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। मान्यता है कि शिवजी के आशीर्वाद से राजा को जीवनदान मिला था।

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां एक भव्य मेले का आयोजन होगा। आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे। हर सोमवार को भी यहां विशेष पूजा होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता विनोद शर्मा ने बताया कि संत भोलादास जी महाराज के आगमन के बाद मंदिर का काफी विकास हुआ है। मंदिर परिसर के नीचे एक गोशाला का भी निर्माण कराया गया है। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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