रानोली में सरकारी कॉलेज को लेकर रैली और हस्ताक्षर अभियान:आगामी राज्य बजट में मंजूरी की उठाई मांग, बोले- उच्च शिक्षा के लिए सीकर जाना पड़ता है
रानोली में सरकारी कॉलेज को लेकर रैली और हस्ताक्षर अभियान:आगामी राज्य बजट में मंजूरी की उठाई मांग, बोले- उच्च शिक्षा के लिए सीकर जाना पड़ता है
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत
रानोली : पलसाना पंचायत समिति के रानोली क्षेत्र में सरकारी महाविद्यालय की कमी के कारण छात्रों को शिक्षा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे पर रविवार को ग्राम पंचायत शिश्युं-रानोली में जनसहयोग से एक रैली और हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। ग्रामीणों ने राज्य सरकार से आगामी बजट सत्र में कॉलेज को स्वीकृति देने की मांग की है।
यह रैली ग्राम पंचायत शिश्युं स्थित राजकीय स्वास्थ्य केंद्र से शुरू हुई और रानोली के पुराना बाजार तथा स्टेशन रोड से होते हुए आरके मैरिज गार्डन तक पहुंची। रैली में शामिल ग्रामीण हाथों में बैनर और प्लेकार्ड लिए हुए थे, जिन पर महाविद्यालय की मांग से संबंधित नारे लिखे थे। सभा में ग्रामीणों ने अपने विचार व्यक्त किए और आंदोलन की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।
पूर्व एसएफआई अध्यक्ष सुरेंद्र फुलवारियां ने बताया कि पलसाना क्षेत्र में लगभग 40 से 45 गांव आते हैं, लेकिन यहां कोई सरकारी कॉलेज नहीं है। जबकि इस क्षेत्र में करीब 150 सरकारी और निजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सीकर तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे विशेषकर छात्राओं को काफी परेशानी होती है। इस वजह से कई छात्र पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।
इस अवसर पर पूर्व सरपंच रामलाल कुमावत, शिश्युं सरपंच जयराम खोवाल, रानोली सरपंच ओंकारमल सैनी, मंगल सिंह शेखावत, ललित पटेल, गोपाल यादव, संतोष गुर्जर, प्यारे लाल गहलोत, मनोज पिपलीवाल, एसएफआई के महिपाल गुर्जर, रामबिलाश फुलवारियां, ओमप्रकाश खर्रा, जुगल कुमावत, विकास जांगिड़, प्यारे लाल जांगिड़, मखनलाल सैनी, राहुल मीणा और मुकेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
शिश्युं सरपंच जयराम खोवाल ने सभी सरपंचों से आग्रह किया कि वे अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव पारित कर लेटरहेड पर हस्ताक्षर और मुहर लगाकर मुख्यमंत्री को भेजें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल कॉलेज की मांग नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और छात्रों के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक शिश्युं-रानोली में सरकारी महाविद्यालय स्वीकृत नहीं हो जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
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