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घांघू के उपाध्याय परिवार ने लिया मृत्यु भोज व ओढ़ावनी प्रथा बंद करने का निर्णय


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घांघू के उपाध्याय परिवार ने लिया मृत्यु भोज व ओढ़ावनी प्रथा बंद करने का निर्णय

घांघू के उपाध्याय परिवार ने लिया मृत्यु भोज व ओढ़ावनी प्रथा बंद करने का निर्णय

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : निकटवर्ती गांव घाघू में समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए गांव घांघू के उपाध्याय परिवार ने मृत्यु भोज एवं ओढ़ावनी की परंपरा को पूर्णतः बंद करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय की समाज के हर वर्ग में मुक्तकंठ से सराहना की जा रही है। पूर्व सरपंच जयप्रकाश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके बड़े भाई बनवारी लाल शर्मा की धर्मपत्नी संतोष शर्मा का 13 जनवरी को निधन हो गया था।

इस दुखद अवसर पर परिवार ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि आगे से परिवार में किसी भी प्रकार का मृत्यु भोज आयोजित नहीं किया जाएगा। परिवार का मानना है कि मृत्यु भोज एक सामाजिक बुराई है, जो शोक की घड़ी में अनावश्यक आर्थिक और सामाजिक दबाव उत्पन्न करती है, इसलिए इसे त्यागना समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर चूरू शहर के गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष जे.पी. जाजड़ा ने उपाध्याय परिवार के निर्णय की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों को ऐसी सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि अन्य लोग भी उनका अनुकरण कर सकें। उन्होंने कहा कि समाज में मृत्यु भोज के विरुद्ध एक नई चेतना विकसित हो रही है और आने वाले समय में मृत्यु भोज-मुक्त समाज की परिकल्पना साकार हो सकेगी।

कार्यक्रम के दौरान बनवारीलाल उपाध्याय, सुरेश कुमार उपाध्याय, राधेश्याम उपाध्याय, जयप्रकाश उपाध्याय, तपेश उपाध्याय, राजकुमार सिवाल, रमेश कुमार जोशी (रतनगढ़) सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। उपाध्याय परिवार की इस पहल से समाज में एक सशक्त संदेश गया है कि परंपराओं के नाम पर चली आ रही कुरीतियों को त्यागकर ही एक सुंदर, स्वस्थ और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है।

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