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दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर धर्मपाल यादव: 40 वर्षों की सेवा के बाद भी समाजसेवा की मिसाल


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दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर धर्मपाल यादव: 40 वर्षों की सेवा के बाद भी समाजसेवा की मिसाल

सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद सात गांवों में पौधारोपण, पीपल विवाह, अभिनंदन समारोह और पोती जन्मोत्सव पर प्रतिभोज के जरिए समानता का संदेश

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : विजेन्द्र शर्मा

खेतड़ी : पुहानिया निवासी धर्मपाल यादव ने दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर रहते हुए 40 वर्षों की दीर्घ, कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित सेवा पूरी की। 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका सामाजिक सरोकार सक्रिय बना हुआ है। सेवाकाल के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज, पर्यावरण और संस्कारों से जुड़े कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया है।

धर्मपाल यादव द्वारा अपने सेवाकाल एवं सेवानिवृत्ति के बाद पुहानिया, चितोसा, जयमल का बास, सातड़ीया, पचेरी और गुति सहित कुल सात गांवों के मोक्षधाम, आश्रम एवं खेल मैदानों में पीपल सहित विभिन्न प्रजातियों के छायादार पौधे लगाए गए। यह पहल क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। लगाए गए वृक्ष आज सार्वजनिक स्थलों पर छाया और हरियाली प्रदान कर रहे हैं।इसी क्रम में 16 जनवरी को पीपल के वृक्ष की विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा एवं विवाह संस्कार संपन्न कराया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का संदेश दिया गया।

17 जनवरी को धर्मपाल यादव की सेवा निवृत्ति के उपलक्ष्य में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इसी दिन उनके यहां पोती के जन्म के अवसर पर नामकरण संस्कार भी संपन्न हुआ। इस अवसर को उन्होंने केवल पारिवारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए समाज के साथ साझा किया।

पोती के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में धर्मपाल यादव द्वारा पुहानिया, चितोसा, जयमल का बास, सातड़ीया, पचेरी और गुती सहित सभी सात गांवों के लिए दो दिवसीय प्रतिभोज का आयोजन किया गया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बेटा और बेटी में कोई भेद नहीं है तथा पोती का जन्म भी समान सम्मान और उत्सव का विषय है।ग्रामीणों के अनुसार धर्मपाल यादव ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया है कि सेवा केवल नौकरी तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति निरंतर जिम्मेदारी निभाना ही वास्तविक सेवा है। सेवाकाल एवं सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक कार्य क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। पूरा आयोजन सामाजिक समरसता, समानता और आपसी भाईचारे का उदाहरण बनकर सामने आया।

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