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प्रभारी मंत्री से वीरांगना बोली- प्रशासन ने शहीद स्मारक तोड़ा:पाबंदी का नोटिस थमाकर गए; अब कलेक्टर करेंगे मामले की जांच


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प्रभारी मंत्री से वीरांगना बोली- प्रशासन ने शहीद स्मारक तोड़ा:पाबंदी का नोटिस थमाकर गए; अब कलेक्टर करेंगे मामले की जांच

प्रभारी मंत्री से वीरांगना बोली- प्रशासन ने शहीद स्मारक तोड़ा:पाबंदी का नोटिस थमाकर गए; अब कलेक्टर करेंगे मामले की जांच

सूरजगढ़ : झुंझुनूं के बामनवास (सूरजगढ़) की रहने वाली वीरांगना जैतुन बानो ने प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत से मुलाकात की। उन्होंने अपने साथ हो रहे अन्याय की दास्तां सुनाई। आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना करते हुए पुलिस जाब्ते के साथ उनके पति शहीद फैज मोहम्मद के स्मारक को बलपूर्वक ढहा दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने तुरंत जिला कलेक्टर को मामले की निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर की सुनवाई से पहले ही चला दी जेसीबी

वीरांगना जैतुन बानो ने ज्ञापन में बताया कि वे अपनी स्वयं की आबादी भूमि पर अपने शहीद पति का स्मारक बनवा रही थीं। इस संबंध में उन्होंने 9 जनवरी 2026 को जिला कलेक्टर से मुलाकात की थी। कलेक्टर ने सूरजगढ़ एसडीएम को दूरभाष पर निर्देश देते हुए वीरांगना को 12 जनवरी को सुनवाई के लिए बुलाने को कहा था। कलेक्टर ने निर्देश दिए थे कि वीरांगना की सुनी जाए।

लेकिन आरोप है कि सुनवाई होने से पहले ही 12 जनवरी की सुबह सूरजगढ़ प्रशासन और भारी पुलिस जाब्ता जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गया। इसके बाद मौके पर स्मारक के लिए रखा मटेरियल, तारबंदी, पिलर सब तोड़ कर चले गए। वीरांगना का कहना है- जब उन्होंने कलेक्टर के आदेश की कॉपी और जमीन के दस्तावेज दिखाने की कोशिश की, तो अधिकारियों ने उन्हें जेल भेजने और मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी।

वीरांगना बोली- मुझे पाबंदी का नोटिस थमाया

प्रभारी मंत्री को दिए ज्ञापन में वीरांगना ने स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसडीएम चिड़ावा द्वारा परिवार को पहले ही 6 महीने की पाबंदी का नोटिस दिया जा चुका है। विरोध करने पर परिवार को जेल में डालने की धमकियां दी जा रही हैं।

वीरांगना का कहना है कि स्थानीय रसूखदार नेताओं के दबाव में प्रशासन उनके साथ अन्याय कर रहा है, जिससे उनका पूरा परिवार दहशत में है।

यह हैं मुख्य मांगें

  • दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  • दबाव बनाने वाले स्थानीय नेताओं की भूमिका की जांच हो।
  • आबादी क्षेत्र की जमीन का पट्टा नवीनीकरण कर शहीद स्मारक निर्माण की अनुमति दी जाए।
  • वीरांगना और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

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