सेना दिवस परेड-2026 : फुल ड्रेस रिहर्सल में हुआ सेना के साहस, शौर्य और स्वाभिमान का जीवंत प्रदर्शन
फुल ड्रेस रिहर्सल को मिला मातृशक्ति का अभूतपूर्व समर्थन, हजारों की संख्या में युवा, विद्यार्थी और आमजन हुए शामिल
जयपुर : राजधानी जयपुर में आर्मी एरिया से बाहर पहली बार आयोजित हो रही सेना दिवस परेड–2026 को लेकर आमजन में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। जगतपुरा स्थित महल रोड पर शुक्रवार को आयोजित पहली फुल ड्रेस रिहर्सल मातृशक्ति को समर्पित रही, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने सहभागिता कर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अनुशासन का सजीव अनुभव किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर सामान्य प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी इस कार्यक्रम को सफल बनाने में निरंतर जुटे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि 11 वे 13 जनवरी को दूसरी और तीसरी फुल ड्रेस रिहर्सल तथा 15 जनवरी को मुख्य परेड का आयोजन किया जाएगा। देश में दिल्ली से बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी करने वाला जयपुर, बैंगलूरू, लखनउ और पुणे के बाद चौथा शहर है। सेना दिवस परेड को जनभागीदारी से जोड़कर आमजन के बीच लाने का निर्णय राष्ट्रभक्ति, नागरिक–सैन्य समन्वय और युवा प्रेरणा का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। यह आयोजन सेना और समाज के बीच मजबूत भावनात्मक सेतु का निर्माण कर रहा है।
फुल ड्रेस रिहर्सल में माहौल हुआ देशभक्ति से ओतप्रोत :
शुक्रवार को आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल से पूर्व सेना के बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति ने वातावरण को जोश और गर्व से भर दिया। इसके पश्चात परेड की शुरुआत अशोक चक्र, परमवीर चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित गैलेंट्री अवॉर्ड विजेता आर्मी अधिकारियों द्वारा परेड कमांडर को सलामी देकर की गई। इन वीर योद्धाओं के नेतृत्व में आर्मी बैंड और घुड़सवार टुकड़ियां अनुशासित कदमताल के साथ आगे बढ़ीं।
मिसाइलों, हथियारों और टैंकों बने आकर्षण का केंद्र :
परेड रिहर्सल में भारतीय सेना की आधुनिक मिसाइलें, मशीनगन, हथियार, टैंक और सैन्य वाहन प्रदर्शित किए गए। ऑपरेशन सिंदूर की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल और अत्याधुनिक रोबोटिक डॉग्स का प्रदर्शन किया गया। हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से लैस ये रोबोटिक डॉग्स आधुनिक युद्ध और निगरानी क्षमताओं का सशक्त उदाहरण बने।
रिहर्सल में एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल टुकड़ी द्वारा दुश्मन के टैंकों को नष्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। परेड में शामिल एंटी एयर मिसाइल सिस्टम, जो 155 राउंड फायर करने में सक्षम है, का उपयोग ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई हमलों को विफल करने में किया गया था। इसकी विशेषता यह है कि इसे हेलिकॉप्टर से भी संचालित किया जा सकता है। इसके साथ ही सेना के अत्याधुनिक ड्रोन, जो 4 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम हैं, ने आधुनिक युद्ध तकनीक की दिशा को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।
भैरव बटालियन ने मोहा दर्शकों का दिल :
सेना दिवस परेड में पहली बार भैरव बटालियन अपनी ताकत और आधुनिक युद्ध क्षमता का प्रदर्शन कर रही है। जनवरी 2026 में गठित यह नई स्पेशल फोर्स ड्रोन आधारित ऑपरेशंस के लिए तैयार की गई है, जिसमें एक लाख से अधिक प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर शामिल हैं। यह यूनिट हाइब्रिड और मल्टी-डोमेन चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। ऑल-टेरेन व्हीकल ने पानी, रेगिस्तान और पथरीले इलाकों में संचालन क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसका उपयोग सैन्य अभियानों के साथ-साथ आपदा राहत और खोज बचाव कार्यों में भी किया जाता है। इसके साथ ही मॉड्यूलर ब्रिज के माध्यम से कम समय में कहीं भी मार्ग निर्माण की क्षमता को प्रदर्शित किया गया, जो युद्ध और आपदा राहत दोनों में उपयोगी है।
चश्मा लगाए डॉग्स ने दर्शकों को किया हैरान :
रिहर्सल में मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पिपराई, कोम्बई और राजपालयम जैसी स्वदेशी नस्लों के डॉग्स ने परेड में अभ्यास किया। विशेष रूप से चश्मा लगाए मुधोल हाउंड ने अपनी चुस्ती, फुर्ती और आक्रामकता से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके साथ ही भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज करतब दिखाए। पिरामिड निर्माण, एक टायर पर बाइक दौड़ाना तथा संतुलन साधते हुए अशोक स्तंभ और कमल जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का प्रदर्शन कर जवानों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
सेना दिवस परेड के सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सेवाएं, आपातकालीन व्यवस्थाएं तथा महिला एवं दिव्यांग दर्शकों की सुविधा सुनिश्चित की गई हैं। विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से आयोजन सुचारु एवं सुरक्षित रूप से संचालित हो रहा है।
गौरतलब है कि यह सेना दिवस परेड न केवल भारतीय सेना के सम्मान और पराक्रम का उत्सव है, बल्कि यह सुशासन, प्रशासनिक समन्वय और संवेदनशील शासन व्यवस्था का भी सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने जयपुर को राष्ट्रीय पटल पर नई पहचान दिलाई है।
सेना दिवस परेड-2026 की फोटो :

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