मां शाकंभरी प्राकट्य महोत्सव पर 18 किमी लंबी पदयात्रा:श्रद्धालु 2 किलोमीटर लंबी चूंदड़ लेकर निकले, लोगों ने की फूलों की बरसात, देशभर से आए लोग
मां शाकंभरी प्राकट्य महोत्सव पर 18 किमी लंबी पदयात्रा:श्रद्धालु 2 किलोमीटर लंबी चूंदड़ लेकर निकले, लोगों ने की फूलों की बरसात, देशभर से आए लोग
उदयपुरवाटी : धार्मिक संस्था शाकंभरी कुटुंब ने शनिवार को प्रसिद्ध शक्ति पीठ मां शाकंभरी के प्राकट्य महोत्सव पर एक विशाल पदयात्रा का आयोजन किया। उदयपुरवाटी से शाकंभरी तक 18 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में हजारों श्रद्धालु 2 किलोमीटर लंबी चूंदड़ लेकर शामिल हुए। पदयात्रियों ने मां शाकंभरी के जयकारे लगाते हुए उन्हें चूंदड़ अर्पित की।
देशभर से आए श्रद्धालु
शाकंभरी कुटुंब सकराय धाम द्वारा आयोजित इस पदयात्रा में देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु पहुंचे। पदयात्रा की शुरुआत जमात स्थित गणपति गार्डन में आरती और पूजा-अर्चना के साथ हुई। विधि-विधान से मां शाकंभरी की पूजा के बाद चुनर पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई गई।
शहर के मुख्य चौराहों से निकली पदयात्रा
श्रद्धालु शहर में चुंगी नंबर तीन, नई मंडी, घूमचक्कर, शाकंभरी गेट और गायत्री गौशाला होते हुए आगे बढ़े। शाम को ये भक्त 2 किलोमीटर लंबी चुंदड़ी के साथ सकराय धाम पहुंचे, जहां उन्होंने मां शाकंभरी को चुंदड़ी अर्पित की और सामूहिक भोजन प्रसादी ग्रहण की। रात में श्रद्धालुओं को बसों से वापस उदयपुरवाटी पहुंचाया गया।
पदयात्रा पर फूलों की बरसात
आयोजकों ने रास्ते में जगह-जगह जलपान की व्यवस्था की थी। शहर में घूमचक्कर, शाकंभरी गेट, रिजनल कॉलेज और गोशाला सहित कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पदयात्रा का फूलों से अभिनंदन किया।
कई राज्यों से आए श्रद्धालु
इस महोत्सव में भाग लेने के लिए देश के कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु आए थे, जिन्होंने अपनी कुलदेवी का प्राकट्य दिवस धूमधाम से मनाया। कार्यक्रम में लगभग 400 से 500 बाहरी श्रद्धालु और करीब 2 हजार स्थानीय लोग शामिल हुए।
वर्चुअल मीटिंग पर हुई कार्यक्रमों की तैयारी
महोत्सव से दो महीने पहले धार्मिक संगठन शाकंभरी कुटुंब की वर्चुअल मीटिंग हुई जिसमें देश के सभी राज्यों और विदेश में बैठे सदस्यों ने कार्यक्रम निर्धारित किया। इस दौरान समय समय पर वर्चुअल मीटिंग के जरिए भक्त एक दूसरे के साथ जुड़े रहे और कार्यक्रम की सूचना से अपडेट होते रहे।
चुंदड़ी का प्रिंट निर्धारित कर सूरत से चुंदड़ी व गोटा तैयार करवाया गया। सूरत से ही श्रद्धालुओं को उनकी मांग के अनुसार कोरियर द्वारा चुंदड़ी और गोटा-बूंटी भेजा गया। निश्चित समय पर गोटा लगाई हुई चुंदड़ियों को उदयपुरवाटी में संग्रहित किया गया। चुंदड़ियों की सिलाई करके रोल तैयार किया गया।
चुंदड़ी पदयात्रा की मान्यता
मां शाकंभरी के प्राकट्य दिवस पर पदयात्रा में काम ली गई चुंदड़ी प्रसाद के रूप में भक्तों को बांट दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में माता की चुंदड़ी पहुंचती है उस घर में सुख-शांति रहती है, विवाह-शादी में आ रही दिक्कत दूर होती है, जिस घर में वंश चलने की दिक्कत है उनका वंश शुरू हो जाता है। रोग, दोष, कलेश आदि दूर होते है। मां शाकंभरी के बहुत से भक्तों ने प्रसाद रूपी चुंदड़ी से फायदा महसूस किया है।
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