हमीरी कलां के जवान संजीव के सम्मान में झुंझुनूं से हमीरी कलां तक निकाली गई तिरंगा यात्रा
सीआरपीएफ के जवान की सैन्य सम्मान से अंत्येष्टि, साढ़े 4 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम, वीरांगना और मां हुई बेसुध
झुंझुनूं : गोहाटी में ड्यूटी के दौरान हमीरी कलां निवासी सीआरपीएफ जवान संजीव तेतरवाल का निधन हो गया। शनिवार को सैन्य सम्मान से अंत्येष्टि की गई। इससे पहले झुंझुनूं से हमीरी तक तिरंगा रैली निकाली गई। जब CRPF के जांबाज जवान संजीव तेतरवाल की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह गांव पहुंची। जैसे ही शव घर के आंगन में लाया गया, वीरांगना पिंकेश, माता विमला देवी व पिता धर्मपाल तेतरवाल बेसुध हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें संभाला। गांव के श्मशान में अंत्येष्टि की गई।परिजनों के विलाप और ग्रामीणों की आंखों से बहते आंसुओं ने हर किसी को भावुक कर दिया। गांव के श्मशान में अंत्येष्टि की गई।
तिरंगा बाइक रैली के साथ पहुंची पार्थिव देह
अंतिम यात्रा से पहले युवाओं ने विशाल तिरंगा बाइक रैली निकालकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। पार्थिव देह पहुंचते ही लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरा गांव अपने लाल को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतर आया।

CRPF ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी अंतिम सलामी
CRPF की टुकड़ी ने सैन्य सम्मान के साथ संजीव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। गम और गर्व के बीच ‘संजीव अमर रहे’ के नारे गूंज उठे। वातावरण शोकाकुल होते हुए भी वीरता और बलिदान पर गर्व से भरा दिखा।

गुवाहाटी में थी पोस्टिंग, सात साल से कर रहे थे सेवाएं
30 वर्षीय संजीव तेतरवाल की पोस्टिंग गुवाहाटी में थी। वे पिछले 7 वर्षों से CRPF में सेवा दे रहे थे। पिता धर्मपाल तेतरवाल, जो पूर्व सरकारी शिक्षक हैं, बेटे की अर्थी के पास पहुंचकर खुद को संभाल नहीं पाए।

ग्रामीण बोले : यह बलिदान कभी नहीं भूलेगा देश
अंतिम दर्शन के लिए जुटी भीड़ ने नम आंखों से कहा कि संजीव का बलिदान गांव ही नहीं, पूरा देश हमेशा याद रखेगा। अंतिम यात्रा में हर उम्र के लोग शामिल हुए और वीर सपूत को भावपूर्ण विदाई दी।
इस मौक़े पर कर्नल हेमंत चौधरी, पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़, पूर्व प्रधान गिरधारीलाल खीचड़, सरपंच दीपक जानू, पूर्व सरपंच सत्यवीर लांबा, रोहिताश कपूरिया व ग्रामीणों ने पुष्पांजलि अर्पित की। साढ़े चार साल के बेटे दिसान ने पिता को मुखाग्नि दी।
संजीव तेतरवाल गोहाटी में तैनात थे। बिहार चुनाव में ड्यूटी के बाद वे 19 नवंबर को ही गोहाटी गए थे। गुरुवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ी हुई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका निधन हो गया। 1989 में जन्मे संजीव तेतरवाल 2015 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। संजीव तेतरवाल तीन बहन-भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके पिता धर्मपाल शिक्षा विभाग में डिप्टी डायरेक्टर से सेवानिवृत हैं। इससे पहले युवाओं ने 10 किमी तक तिरंगा रैली निकाली।
20 को ही लौटे थे बिहार से, आने वाले थे गांव
संजीव के भाई विकास तेतरवाल ने बताया कि दो महीने के लिए संजीव की ड्यूटी बिहार चुनाव में लगाई गई थी। तब संजीव ने पत्नी पिंकेश व बेटे दिशान को गांव भेज दिया था। अब 20 नवंबर को ही संजीव बिहार चुनाव से वापस अपने मूल पदस्थापन स्थान गोवाटी लौटे थे। वे गांव आने का कार्यक्रम बना रहे थे। दिसंबर में वे छुट्टी लेकर गांव आने वाले थे। तब वे पत्नी पिंकेश और बेटे दिशान को वापस साथ लेकर जाते। संजीव हर सुबह और शाम पिता धर्मपाल सिंह और माता बिमला देवी से बात करते थे। गुरुवार को भी मां और पत्नी से बात की थी। लेकिन दोपहर में अचानक तबीयत बिगड़ गई।
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