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पाटन कॉलेज में नई लाइब्रेरी, वाचनालय का उद्घाटन:छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं बढ़ीं


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पाटन कॉलेज में नई लाइब्रेरी, वाचनालय का उद्घाटन:छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं बढ़ीं

पाटन कॉलेज में नई लाइब्रेरी, वाचनालय का उद्घाटन:छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं बढ़ीं

पाटन : पाटन के राजकीय कॉलेज में शनिवार को दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के तहत नियमित एवं बाह्य छात्रों के लिए पुस्तकालय एवं वाचनालय का उद्घाटन किया गया। साथ ही एनएसएस का तृतीय एकदिवसीय शिविर भी आयोजित किया गया।

पुस्तकालय एवं वाचनालय का उद्घाटन पूर्व संयुक्त निदेशक एवं आयुक्त, कॉलेज शिक्षा, प्रो. के. आर. सिलोलिया ने किया। अपने संबोधन में डॉ. सिलोलिया ने कहा कि ये आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित केंद्र छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, शोध और अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मदन लाल मीणा ने बताया कि पुस्तकालय में नियमित रूप से पत्र-पत्रिकाएं, जर्नल्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की सभी आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कोई पुस्तक उपलब्ध न हो, तो स्टाफ को सूचित करने पर एक सप्ताह के भीतर उसे उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बाह्य छात्र निर्धारित शुल्क जमा कर नियमित पाठक बन सकते हैं। ये सुविधा कार्यालय दिवसों में सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेगी। आचार्य योगेश कुमार सबल ने सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के टिप्स दिए।

एनएसएस के तृतीय एकदिवसीय शिविर में वीरांगना झलकारी बाई के जन्मदिवस पर उनके कार्यों पर प्रकाश डाला गया। एनएसएस प्रभारी सहायक आचार्य किरण यादव ने बताया कि शिविर में छात्रों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक-मुक्त परिसर, सामाजिक जागरूकता और नेतृत्व कौशल जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया। एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक गतिविधियों में भाग लिया।

सहायक आचार्य सरोज गुर्जर ने छात्र जीवन में पुस्तकालय के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि सहायक आचार्य रितु शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस आयोजन को सफल बनाने में सहायक लेखा अधिकारी महेंद्र मधुकर वर्मा, प्रयोगशाला सहायक डॉ. सीता मीणा, डॉ. धर्मवीर कुमावत, डॉ. सुमैया और सहायक आचार्य जितेंद्र मीणा का भी योगदान रहा।

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