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राजस्थान दिवस विशेष:वृहद राजस्थान का पहला दिन…सरदार पटेल ने समझाया- महासागर के मगरमच्छ जो कर सकते हैं, कुएं के मेंढक नहीं


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राजस्थान दिवस विशेष:वृहद राजस्थान का पहला दिन…सरदार पटेल ने समझाया- महासागर के मगरमच्छ जो कर सकते हैं, कुएं के मेंढक नहीं

राजस्थान दिवस विशेष:वृहद राजस्थान का पहला दिन...सरदार पटेल ने समझाया- महासागर के मगरमच्छ जो कर सकते हैं, कुएं के मेंढक नहीं

जयपुर : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत, बुधवार… 30 मार्च 1949 रेवती नक्षत्र इंद्र योग की सुबह 10:40 बजे। यानी नवसंवत्सर। वृहद राजस्थान का पहला दिन था।। सिटी पैलेस जयपुर के दरबार हॉल प्रांगण में सरदार पटेल ने इसकी घोषणा की। असल में इस दिन से पहले तक जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और सिरोही आदि रियासतें संयुक्त राजस्थान का हिस्सा नहीं थीं, जिनका एकीकरण कर सरदार पटेल ने वृहद राजस्थान की घोषणा की। बोले- राजपूताना की पुरानी कीर्ति आज भी हमें अभिमान से भर देती है…। कुछ दिन बाद 15 मई 1949 को अलवर व करौली का भी इसमें विलय हो गया।

राजस्थान दिवस के एक दिन पहले यानी 29 मार्च 1949 को सरदार पटेल दिल्ली से जयपुर के लिए निकले थे। लेकिन, विमान शाहपुरा के पास खराब हो गया और एक सूखी नदी में उतारना पड़ा। एक कार की व्यवस्था की गई तो वे देर रात रामबाग होटल पहुंचे। अगले दिन यानी वर्ष प्रतिपदा पर 30 मार्च को ठीक 10:40 बजे वृहद राजस्थान का उद्घाटन किया गया और नए राजस्थान की आधारशिला रखी गई। पटेल ने कहा था कि हम राजपूताना के हैं भी, तो सब से पहले हम हिंदुस्तानी हैं।

इस प्रकार के ख्याल से हमें यह कार्य करना है। यह ठीक है कि हर जयपुरवासी को जयपुर का गर्व होना चाहिए, वैसे ही सब रियासतों में होना चाहिए। लेकिन, एक छोटे से कुएं में जो मेंढक रहता है, उसका दिमाग फैलता नहीं है, उसकी शक्ति भी बढ़ती नहीं है। महासागर में जो मगरमच्छ रहते हैं, वह जो खेल कर सकते हैं, वह कुएं के मेंढक नहीं कर सकते। हम सब हिन्दुस्तान के हैं। इसके लिए हमारी वफादारी चाहिए।

स्रोत: नूतन पुरातन (सीताराम झालानी), विधान बोधनी व पूर्व सीएम हीरालाल शास्त्री की आत्मकथा एवं नववर्ष समारोह समिति

राजपूताना में आज नए साल का जश्न प्रारम्भ है तो आज के दिन हमें नए महा-राजस्थान के महत्व को पूर्ण रीति से समझ लेना चाहिए। अपना हृदय साफ कर ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें राजस्थान के लिए योग्य राजस्थानी बनाए। राजस्थान को उठाने के लिए, प्रजा की सेवा के लिए ईश्वर हमको शक्ति और बुद्धि दे, आज हमें ईश्वर से यही आशीर्वाद मांगना है। -सरदार वल्लभ भाई पटेल,तत्कालीन गृहमंत्री ( जैसा 30 मार्च, 1949 को वर्ष प्रतिपदा पर कहा)

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