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कंज्यूमर वॉइस अभियान शुरू करेगा जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग:पीठासीन अधिकारी बोले- एक साल में 1146 मामलों का निपटारा किया


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कंज्यूमर वॉइस अभियान शुरू करेगा जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग:पीठासीन अधिकारी बोले- एक साल में 1146 मामलों का निपटारा किया

कंज्यूमर वॉइस अभियान शुरू करेगा जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग:पीठासीन अधिकारी बोले- एक साल में 1146 मामलों का निपटारा किया

झुंझुनूं  : झुंझुनूं जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के जिला अध्यक्ष मनोज मील ने एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर गुरुवार को मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा- पहले की बजाय अब आयोग के समक्ष आने वाले मामलों की संख्या में इजाफा हुआ है। हर उपभोक्ता को जागरूक करने और उनकी आवाज बनने के लिए आयोग आगामी दिनों में कई नवाचार करेगा।

उन्होंने कहा- हर व्यक्ति एक उपभोक्ता है। उसे जिस तरह एक अपने नागरिकों के अधिकारों का पता होता है, वैसे ही उसे अपने उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी हो, इसके लिए आयोग सामूहिक प्रयास करेगा। इस प्रयास को कंज्यूमर वॉइस अभियान नाम दिया गया है।

इसके तहत आगामी दिनों में सोशल मीडिया के जरिए आयोग सीधे तौर पर आमजन से जुड़ेगा। जो आमजन न होकर, आयोग के लिए एक उपभोक्ता है। इसके लिए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंज्यूमर वॉइस के नाम से अकाउंट बनाकर सभी को न केवल उनके उपभोक्ता अधिकारों के बारे में बताया जाएगा। बल्कि उनके छोटे-मोटे सवालों, शंकाओं को दूर करेगा, ताकि हर व्यक्ति उपभोक्ता अधिकारों को बारीकी से जान सके।

एक साल में 1146 मामलों का निपटारा

अध्यक्ष मनोज मील ने बताया- पीठासीन अधिकारी के रूप में पिछले एक वर्ष में 1146 प्रकरणों का निपटारा किया गया है। यह प्रदेश में सर्वाधिक है। कई फैसले तो प्रदेश भर में चर्चा का विषय बने हैं। उन्होंने बताया कि गत वर्ष से पहले 10 से 12 वर्षों के मामले लंबित थे। अब 5 वर्ष या उससे अधिक अवधि के लंबित मामले लगभग निस्तारित कर दिए गए हैं, सिर्फ 16 प्रकरण शेष हैं, जो भी अन्तिम बहस व निर्णय की स्थिति में हैं। इसके साथ ही आयोग में दर्ज परिवादों की संख्या भी बढ़ी है, जो इस बात का सूचक है कि आमजन में उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

अध्यक्ष मनोज मील ने बताया कि उनके कार्यकाल में कई फैसले आए जो अब मिसाल बन चुके हैं। आयोग ने आरपीएससी, अस्पताल और कोचिंग के विरूद्ध आए मामलों तक में फैसला दिया। आरपीएससी ने परमिशन लेटर में गलती की, जिसके कारण दो जने पेपर नहीं दे पाए। इस मामले में जिला आयोग के फैसले के बाद आरपीएससी राष्ट्रीय आयोग तक चली गई। लेकिन राष्ट्रीय आयोग ने भी आरपीएससी को राहत नहीं दी। अब हम जल्द ही इस मामले में परिवादियों को राहत दिलाते हुए अधिनियम के अनुसार आरपीएससी से जिला आयोग के आदेश की पालना करवायेगें। ऐसे कई फैसले दिए जो मिसाल बन गए।

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