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बेटे ने 20 साल बाद चुकाया पिता का कर्जा:कहा- लेनदारों ने माफ किया था, लेकिन मुझे चुकाना था; पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव मनाया


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बेटे ने 20 साल बाद चुकाया पिता का कर्जा:कहा- लेनदारों ने माफ किया था, लेकिन मुझे चुकाना था; पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव मनाया

बेटे ने 20 साल बाद चुकाया पिता का कर्जा:कहा- लेनदारों ने माफ किया था, लेकिन मुझे चुकाना था; पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव मनाया

झुंझुनूं : झुंझुनूं में पिता के निधन के बाद परिवार पर करीब एक करोड़ रुपए का कर्ज था। 69 लेनदारों ने मुश्किल समय में 90 फीसदी कर्ज माफ कर दिया, लेकिन बेटे मधुसूदन खेतान ने इसे अपनी जिम्मेदारी का अंत नहीं माना। 23 साल की उम्र में लिया गया संकल्प पूरा करने में उन्हें 20 साल लग गए। रविवार को पिता स्वर्गीय संतोष कुमार खेतान की स्मृति में आयोजित ‘पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव’ में इस संकल्प की पूर्णता की घोषणा की गई।

दरअसल, साल 2006 में संतोष कुमार खेतान के निधन के समय परिवार पर करीब एक करोड़ रुपए की देनदारी थी। स्टेशनरी का कारोबार बंद हो चुका था। महज 23 साल के मधुसूदन के सामने परिवार चलाने और पिता के नाम से जुड़ा कर्ज चुकाने की चुनौती थी।परिवार ने अपनी संपत्ति बेचकर करीब 69 लेनदारों को बकाया राशि का 10 प्रतिशत भुगतान किया। परिवार की आर्थिक स्थिति देखते हुए लेनदारों ने आपसी सहमति से शेष 90 प्रतिशत कर्ज माफ कर दिया। इससे परिवार को बड़ी राहत मिली।

20 साल बाद चुकाईं पिता के नाम से जुड़ी देनदारी

मधुसूदन ने बताया कि उन्होंने कर्ज माफी को अपनी जिम्मेदारी का अंत नहीं माना। उन्होंने संकल्प लिया कि जब भगवान सक्षम बनाएंगे, तब एक-एक पाई चुका देंगे। यह संकल्प किसी कानूनी दबाव में नहीं, बल्कि पिता के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना से लिया गया था।

पिता का कारोबार बंद होने के बाद मधुसूदन ने नए सिरे से काम शुरू किया। मेहनत से आर्थिक स्थिति मजबूत की और वर्तमान में राजस्थान सरकार में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं। करीब 20 साल बाद उन्होंने पिता के नाम से जुड़ी देनदारी चुकाने का संकल्प पूरा किया।

संतोष खेतान के बेटे मधुसूदन ने कहा कि वे किसी भी प्रकार का ऋण बकाया नहीं रखना चाहते थे।
संतोष खेतान के बेटे मधुसूदन ने कहा कि वे किसी भी प्रकार का ऋण बकाया नहीं रखना चाहते थे।

रविवार को सामुदायिक विकास भवन में आयोजित महोत्सव में पितृ ऋण मुक्ति की औपचारिक घोषणा की गई। परिवार की अगली पीढ़ी यानी पौत्र-पौत्री ने पाठ किया। मुश्किल समय में साथ देने वाले सहयोगियों का सम्मान हुआ। परिवार ने गोसेवा के लिए 1.50 लाख रुपए और श्री चावोसती दादी मंदिर की सेवा के लिए एक लाख रुपए देने का निर्णय भी लिया।

महोत्सव में सम्मानित करते हुए परिवार के सदस्य।
महोत्सव में सम्मानित करते हुए परिवार के सदस्य।

पौत्र-पौत्री ने किया पाठ, सहयोगियों का सम्मान

सामुदायिक विकास भवन में हुए ‘पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव’ में परिवार ने इस 20 साल के सफर को याद किया। प्रोग्राम में पिता के संघर्ष और बेटे की संकल्प यात्रा का वृत्तांत सुनाया गया। परिवार की अगली पीढ़ी ने भी आयोजन में भागीदारी निभाई।

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