बिना सबूत केस करने वाले पर 2 हजार का जुर्माना:दुकानदार ने रकम लेने के बाद भी नहीं कराया इंश्योरेंस, अब चुकाने होंगे 36 हजार
बिना सबूत केस करने वाले पर 2 हजार का जुर्माना:दुकानदार ने रकम लेने के बाद भी नहीं कराया इंश्योरेंस, अब चुकाने होंगे 36 हजार
सीकर : सीकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दो अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाया है। आयोग ने बिना सबूत कोर्ट का समय बर्बाद करने वाले परिवादी पर जुर्माना लगाया है, वहीं ग्राहक से इंश्योरेंस के नाम पर ठगी कर चोरी हुए फोन का क्लेम ना देने वाले दुकानदार को ब्याज सहित मुआवजा चुकाने का आदेश दिया है। आयोग अध्यक्ष अजय कुमार बंसल और सदस्या नीतू जांगिड़ ने ये अहम फैसले दिए हैं।
1. बिना सबूत केस करने वाले पर 2 हजार का जुर्माना
पहले मामले में हितेंद्र सिंह ने पिपराली रोड स्थित राधिका फर्नीचर से 38 हजार रुपए में सोफा सेट खरीदा था। परिवादी ने फर्म पर पक्का बिल और वारंटी नहीं देने का आरोप लगाते हुए नया सोफा या पूरी रकम वापस करने के साथ 60 हजार रुपए मुआवजे की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि हितेंद्र सिंह ने अपने आरोपों के समर्थन में न तो पक्का बिल पेश किया और न ही सोफे की फोटो या कोई अन्य ठोस सबूत दिया। उन्होंने केवल एक अनुमानित एस्टीमेट प्रस्तुत किया था। आयोग ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए परिवाद खारिज कर दिया। साथ ही परिवादी पर 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। यह राशि 45 दिन के भीतर राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष, जयपुर में जमा करानी होगी।
2. फोन चोरी होने और एफआईआर के बाद भी नहीं दिया क्लेम
दूसरे मामले में हमीरपुरा निवासी रामलाल ने ‘इंडियन मोबाइल’ से 11 हजार रुपए में मोबाइल खरीदा था। दुकानदार को 899 रुपए अतिरिक्त देकर सिस्का इंश्योरेंस भी करवाया था। कुछ समय बाद मोबाइल चोरी हो गया। पीड़ित ने इसकी एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद दुकानदार ने इंश्योरेंस क्लेम दिलाने में मदद नहीं की।
899 रुपए लेकर भी नहीं कराया इंश्योरेंस
आयोग की जांच में सामने आया कि दुकानदार ने ग्राहक से इंश्योरेंस के नाम पर 899 रुपए तो ले लिए, लेकिन यह राशि बीमा कंपनी में जमा ही नहीं कराई। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए दुकानदार को मोबाइल की मूल कीमत 11 हजार रुपए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए।
इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 15 हजार रुपए और मुकदमे के खर्च के 10 हजार रुपए भी देने होंगे। दुकानदार को 45 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। तय समय में भुगतान नहीं करने पर 25 हजार रुपए की अतिरिक्त मुआवजा और मुकदमा खर्च की राशि पर भी 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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