शहीद पति के लिए करवा चौथ व्रत रख रहीं वीरांगना:बोलीं- आज भी लगता है कि वे मेरे साथ हैं, शुभ काम में सबसे पहले करती हूं याद
शहीद पति के लिए करवा चौथ व्रत रख रहीं वीरांगना:बोलीं- आज भी लगता है कि वे मेरे साथ हैं, शुभ काम में सबसे पहले करती हूं याद
झुंझुनूं : झुंझुनूं जिले के ढीगाल गांव की वीरांगना मीना देवी आज भी हर करवा चौथ पर अपने शहीद पति अजय सिंह चौधरी के नाम का व्रत रखती हैं। पति को शहीद हुए 10 साल हो चुके हैं, लेकिन मीना के लिए उनका साथ आज भी पहले जैसा ही है। देश की रक्षा करते हुए अजय सिंह ने 14 जून 2016 को अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
इसके बाद मीना की जिंदगी जरूर बदल गई, लेकिन पति के प्रति उनका प्रेम, विश्वास और श्रद्धा आज भी कायम है। उनके लिए करवा चौथ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उस रिश्ते को महसूस करने का दिन है, जिसे पति की शहादत भी उनसे अलग नहीं कर सकी।
मीना जब करवा चौथ का व्रत रखती हैं, तो उनके मन में पति की यादें ताजा हो जाती हैं। वह इसे केवल बीते समय को याद करने का दिन नहीं मानतीं, बल्कि उस विश्वास को दोहराने का अवसर मानती हैं, जिसके सहारे उन्होंने पति की शहादत के बाद जिंदगी को संभाला है। मीना कहती हैं- आज करवा चौथ का पर्व है और मुझे लगता है कि वे मेरे साथ हैं और हमेशा साथ रहेंगे। इसी बात को ध्यान में रखकर मैंने यह व्रत किया है और आगे भी हमेशा करती रहूंगी।
शहादत के बाद भी नहीं बदला रिश्ते का अहसास
14 जून 2016 का दिन मीना के जीवन में ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। देश की रक्षा करते हुए पति अजय सिंह चौधरी शहीद हो गए। एक सैनिक की शहादत देश के लिए गर्व का विषय होती है, लेकिन उसके परिवार के लिए इस गर्व के साथ जीवनभर की कमी भी जुड़ जाती है।
मीना के जीवन में भी यही हकीकत आई। पति की शहादत के बाद परिस्थितियां बदल गईं, लेकिन उन्होंने अपने रिश्ते को केवल पुरानी यादों तक सीमित नहीं रहने दिया। उनके लिए अजय सिंह आज भी परिवार का हिस्सा हैं और उन्हें हर कदम पर पति का साथ और आशीर्वाद महसूस होता है।
घर में शुभ काम हो तो सबसे पहले शहीद पति को करती हैं याद
मीना के लिए अजय सिंह की याद किसी एक दिन या त्योहार तक सीमित नहीं है। परिवार में जब भी कोई शुभ काम होता है, तो सबसे पहले शहीद पति को याद किया जाता है। उनकी तस्वीर के सामने पूजा की जाती है और पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। मीना बताती हैं कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले पति को वह देवता की तरह पूजती हैं। परिवार में होने वाले शुभ कार्यों की शुरुआत भी उन्हें याद करके ही की जाती है।
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