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8-साल से शहीद पति के नाम करवा चौथ का व्रत:सोलह श्रृंगार के बाद प्रतिमा की उतारती हैं आरती, वीरांगना बोलीं- वे आज भी मेरे दिल में जिंदा


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8-साल से शहीद पति के नाम करवा चौथ का व्रत:सोलह श्रृंगार के बाद प्रतिमा की उतारती हैं आरती, वीरांगना बोलीं- वे आज भी मेरे दिल में जिंदा

8-साल से शहीद पति के नाम करवा चौथ का व्रत:सोलह श्रृंगार के बाद प्रतिमा की उतारती हैं आरती, वीरांगना बोलीं- वे आज भी मेरे दिल में जिंदा

श्रीमाधोपुर : “18 अक्टूबर 2018 को मेरे पति जम्मू-कश्मीर के द्रास में देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। मगर वे आज भी मेरे दिल में जिंदा हैं। मैं उनकी याद में 8 साल से करवा चौथ का व्रत रख रही हूं।” सीकर जिले के श्रीमाधोपुर नगरपालिका के वार्ड 35 की बिजांवाली ढाणी में रहने वाली सुमन देवी हर साल अपने पति की याद में करवा चौथ का व्रत रखती हैं। करवा चौथ के दिन उन्होंने व्रत रखा और अपने शहीद पति महेश कुमार निठारवाल की प्रतिमा की आरती उतारी।

2017 में हुई थी शादी

अपनी शादी और पहले करवा चौथ को याद करते हुए सुमन देवी (29) ने कहा- पुरानी बातें याद करने के दौरान ऐसा लगता है कि जैसे कल की ही बात हो। 18 मार्च 2017 को मेरी शादी इनसे (महेश कुमार निठारवाल) के साथ हुई थी। शादी के बाद जब पहला करवा चौथ आया तो वे (पति) ड्यूटी पर थे। सोलह श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की। रात में चांद को देखकर जल चढ़ाया। इस तरह मैने अपना पहला करवा चौथ मनाया।

महेश 2016 में सेना में भर्ती हुए थे।
महेश 2016 में सेना में भर्ती हुए थे।

द्रास में ड्यूटी के दौरान हुए थे शहीद

अगले ही साल 18 अक्टूबर को जिंदगी पूरी तरह से अलग हो गई। जम्मू कश्मीर के द्रास में ड्यूटी के दौरान वह (पति) बर्फ में दब गए। देश की सेवा करते-करते महेश जी शहीद हो गए। शादी के 20 महीने बाद और दूसरे करवा चौथ से 9 दिन पहले ही तिरंगे में लिपटी उनकी पार्थिव देह घर के आंगन में पहुंची।

दीपावली पर घर आने के लिए कहा था

हादसे से पहले उन्होंने मुझसे कहा था कि इस बार दीपावली अपनी बेटी के साथ मनाऊंगा। मगर नियति को ये मंजूर नहीं था। 7 महीने के बेटी अनुष्का ने पिता की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी।

पति के शहीद होने के बाद 2019 में रखा व्रत

उनके जाने के बाद पहली बार 2019 में मैने करवा चौथ व्रत रखा। महेश जी मेरे साथ नहीं थे। मगर चांद में ही मैने उनका चेहरा देखा। यह पर्व केवल एक रस्म नहीं,बल्कि उनके के साथ बिताए पलों और अटूट रिश्ते को याद करने का मौका होता है।

पहले हर साल उनकी तस्वीर पर तिलक लगाकर आरती उतारती थी। इसके बाद 18 अक्टूबर 2023 को घर के पास कल्याणपुरा रोड पर उनकी प्रतिमा लगाई गई। इसके बाद हर साल प्रतिमा के पास आकर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हूं।

2016 में सेना में भर्ती हुए थे

शहीद के पिता गिरधारी लाल ने बताया- मार्च 2016 में महेश सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुए। वे 6 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। उनकी बेटी अनुष्का अब 8 साल की हो चुकी है और तीसरी क्लास में पढ़ाई करती है। महेश की शहादत के बाद परिवार को उनकी कमी हमेशा खलती है। हालांकि, देश के लिए उनका बलिदान परिवार के लिए गर्व का विषय है।

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