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चंचलनाथ टीले पर चांदनी रात में बरसी भक्ति की अमृतधारा, 151 किलो खीर का महाप्रसाद बांटा


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चंचलनाथ टीले पर चांदनी रात में बरसी भक्ति की अमृतधारा, 151 किलो खीर का महाप्रसाद बांटा

पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज के सानिध्य में मना शरद पूर्णिमा महोत्सव, देर रात तक गूंजे भजन

झुंझुनूं : शहर के प्रसिद्ध चंचलनाथ टीले पर शरद पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। टीले के पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज के सानिध्य में आयोजित महोत्सव में साधु-संतों और भजन कलाकारों ने भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित की कि पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। आयोजन का मुख्य आकर्षण चंद्रमा की रोशनी में रखी गई 151 किलो खीर का महाप्रसाद रहा, जिसे भजन संध्या के बाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

संत विचारनाथ महाराज ने शरद पूर्णिमा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को अमृतमयी माना जाता है। इसी परंपरा के तहत चंचलनाथ टीले पर 151 किलो खीर तैयार कर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखी गई। बाद में श्रद्धालुओं को खीर का महाप्रसाद वितरित किया गया।

महाप्रसाद वितरण से पहले भव्य भजन संध्या का आयोजन हुआ। इसमें साधु-संतों और स्थानीय भजन कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत की मधुर धुनों से टीले का वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया। श्रद्धालु देर रात तक भजनों का आनंद लेते रहे। भजन संध्या के समापन पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया।

महोत्सव में बूटिया धाम के महंत निरंजन नाथ महाराज, राजनाथ महाराज और गणपतनाथ महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं का सानिध्य रहा। इस अवसर पर डॉ. संजय कटेवा, उमाशंकर महमिया, अनिल जांगिड़, राकेश व्यास, विनोद पुरोहित, फूलाराम सैनी, शंभू शंकर पुरोहित, विमल सैनी, रामु सैनी फोटोग्राफर, सुशील वाक्याण, नारायण प्रसाद किरोड़ीवाल, राजकुमार बेरवाल, राजेश शर्मा और चूरू के वेद प्रकाश सैनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

चंचलनाथ टीले पर आयोजित शरद पूर्णिमा महोत्सव में धार्मिक आस्था, संत परंपरा और सामूहिक भक्ति की सुंदर झलक देखने को मिली। चांदनी रात में भजन संध्या और खीर के महाप्रसाद के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहा।

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