मौत का बम, कहें या HP गैस की गाड़ी? फतेहपुर की सड़कों पर बेखौफ ‘मौत का तांडव’!
रसूख का दम या सेटिंग का खेल? डोर-टू-डोर सर्विस देने वाले HP गैस के वाहन ने बढ़ाया शहर में खौफनाक खतरा! हर दिन सड़क पर फिर भी आरटीओ की नजर से दूर? हादसा हो गया तो जिम्मेदार कोन..?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान दाडून्दा
फतेहपुर शेखावाटी : इसे ‘मौत का चलता-फिरता बम’ कहें या ‘पहियों पर दौड़ता ताबूत’? इस खौफनाक और कड़वे सच का फैसला आज आप इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद खुद ही कर लेंगे।
हर महीने या हफ्ते आपके घर के बाहर एक सुरीली घंटी गूंजती है- “लीजिए, HP गैस की गाड़ी आ गई है, बाहर आ जाइए!” लेकिन जरा ठहरिए साहब! बाहर कदम निकालने से पहले एक बार सोचिए और अपनी खुद की बीमा पॉलिसी चेक कर लीजिए। जिसे आप अपनी रसोई की सहूलियत समझ रहे हैं, वह फतेहपुर की तंग गलियों और चौराहों पर बेखौफ दौड़ता हुआ एक ऐसा ‘डेथ ट्रैप’ बन चुका है, जो न जाने कब पूरे शहर को बिना दिवाली के ही धुएं में उड़ा दे! और इंश्योरेंस क्लेम तक भी न मिले।
एक तरफ सीकर एसपी का ‘सड़क सुरक्षा अभियान’ उफान पर है, आरटीओ की टीमें आए दिन ट्रको के पीछे सरकारी गाड़ियां दौड़ाती नजर आती हैं; वहीं दूसरी तरफ फतेहपुर में रसूख की छत्रछाया में HP गैस का यह कागजों के आधार पर खटारा कबाड़ वाहन खुलेआम यमराज को दावत दे रहा है।

कागजों का ‘डस्टबिन’, और सिस्टम की आंख पर पट्टी!
जब टीम खोल ने पड़ताल की गहराई में उतरकर इस एचपी गैस के वाहन (संख्या RJ 23 GB 6846) का ‘कुंडली-विश्लेषण’ किया गया, तो आरटीओ और यातायात विभाग के खोखले तंत्र का ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला सच सामने आया कि कोई भी माथा पकड़ ले!
सिस्टम की नजरो से दूर डोर-टू-डोर होम डिलीवरी का पुण्य-काम कर रही इस महान गाड़ी की फिटनेस 6 साल पहले यानी 24 अप्रैल 2020 को ही दम तोड़ चुकी है। यानी पिछले 6 सालों से बिना किसी तकनीकी जांच और बिना किसी सेफ्टी सर्टिफिकेट के यह ‘सुपरसोनिक कबाड़’ रसोई गैस के दर्जनों बारूद जैसे सिलेंडरों को लादे शहर की तंग गलियों में दौड़ रहा है। इसका इंश्योरेंस 16 मई 2025 को ही अंतिम सांसें ले चुका है, और पॉल्यूशन (PUC) सर्टिफिकेट का तो शायद मालिक और आरटीओ दोनो को भी आज तक अता-पता नहीं है! कि कभी बना था या नहीं?।
अब सवाल यह है कि एलपीजी जैसे अति-संवेदनशील और खतरनाक श्रेणी में चलने वाले इस वाहन के सारे कानूनी दस्तावेज आखिर किस प्रभावशाली नेता या अधिकारी के ‘पावन आशीर्वाद’ से डस्टबिन की शोभा बढ़ा रहे हैं?
लाखों के चालानों का जखीरा, पर रसूख के आगे सब फेल!
हैरानी की बात तो यह है कि जब-जब यह कबाड़ गाड़ी टोल के सामने आई, तब-तब इसके ऑनलाइन चालान काटे गए। आज इस गाड़ी पर लाखों रुपये के चालान पेंडिंग पड़े हुए हैं। लेकिन रसूख और सेटिंग के दंभ में अंधे हो चुके इसके मालिकों ने न तो कभी सरकारी खजाने में चालान भरने की जहमत उठाई और न ही फिटनेस-बीमा पॉल्यूशन कराने का काम किया।
कानून के रखवालों के सामने सवाल खड़ा है कि लाखों का फाइन बकाया होने के बावजूद यह गाड़ी सीना तानकर शहर में आज भी बिना वैध कागजों के कैसे घूम रही है? क्या आरटीओ का कानून सिर्फ आम और शरीफ आदमी का चालान काटने के लिए ही जिंदा है?
मोहल्लों में खेलते मासूम, और यमराज का यह ‘कबाड़ रथ’!
दिनभर यह गैस के सिलेंडरों से लदा यह वाहन फतेहपुर की घनी गलियों में दौड़ता है, जहाँ आपके और हमारे घर के छोटे-छोटे मासूम बच्चे खेलते हैं, बुजुर्ग धूप सेकते हैं। खुदानखास्ता अगर बिना फिटनेस बिना इंश्योरेंस वाले ‘कबाड़ रथ’ में गैस रिसाव से कोई धमाका हो गया, तो वहां बिछने वाली लाशों का सेहरा प्रशासन किसके सिर बांधेंगा? क्योंकि इंश्योरेंस फिटनेस तो पहले ही स्वर्ग सिधार चुके हैं।
यह रिपोर्ट सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सोए हुए प्रशासन और आरटीओ विभाग के कानों तक भेजी गई एक सूचना है! अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद आरटीओ का कानून का डंडा इस ‘कबाड़ वाहन’ को तुरंत जब्त करके सीज करता है या फिर रसूखदार मालिकों के आगे फतेहपुर की बेकसूर जनता को यूं ही मौत के मुहाने पर धकेले रखता है!
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