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स्कूल में हाजिरी, विधायक के कार्यक्रम में मंच संचालन: शिक्षक की भूमिका पर उठे सवाल


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स्कूल में हाजिरी, विधायक के कार्यक्रम में मंच संचालन: शिक्षक की भूमिका पर उठे सवाल

बांठोद स्कूल के शिक्षक पर आरोप, विभागीय अधिकारियों के जवाबों में भी सामने आया विरोधाभास; जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच की बात कही

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान दाडून्दा

फतेहपुर : राजस्थान में सरकार बदली, हुकमरान बदले और शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बड़े-बड़े दावे किए गए। लेकिन सरकारी सिस्टम में जोंक की तरह चिपकी सुस्ती और मनमर्जी बदलने का नाम आज भी नहीं ले रही। ताजा मामला बांठोद सीनियर सेकेंडरी स्कूल का है, जहां के सरकारी शिक्षक बनवारी लाल ने 7 सितंबर 2026 को अपनी प्रशासनिक ‘सक्रियता’ और राजनीतिक ‘निष्ठा’ का ऐसा बेजोड़ नमूना पेश किया है कि पूरा शिक्षा महकमा बगलें झांक रहा है। और अब गोलमाल जवाब देते नजर आ रहा हैं।

​आचार संहिता लागू है, कड़े निर्देश जारी हैं, लेकिन मास्टर साहब को न तो नियमों का खौफ है और न ही अपनी नौकरी की गरिमा का ध्यान। सुबह स्कूल पहुंचकर रजिस्टर में बाकायदा हाजिरी दर्ज की, ताकि सरकारी खजाने से वेतन का हक सुरक्षित रहे, और फिर जा पहुंचे उपस्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन समारोह में! वहां कोई शैक्षणिक कार्यशाला नहीं चल रही थी, बल्कि विधायक हाकम अली समेत दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में मास्टर जी बड़े चाव से माइक थामकर मंच संचालन (एंकरिंग) फरमा रहे थे।

​गोलमाल पुलिंदा: ‘घरेलू काम’ से लेकर ‘स्कूल का काम’ तक
​जब जनमानस की टीम ने मास्टर साहब से सीधा सवाल किया, तो वे पल-पल में अपने ही बयानों में उलझते नज़र आए: मास्टर साहब ने ​पहला पैंतरा फेंका कि “मैं तो अपने किसी निजी और घरेलू काम से गया था।” (सवाल यह है कि कांग्रेसी विधायक के मंच पर माइक संभालना कब से मास्टर जी का ‘घरेलू काम’ हो गया?)

​जब हमारी टीम ने सवाल को थोड़ा सा बदलकर और घुमाकर पूछा तो मास्टर साहब ने दूसरा पैंतरा फेंक दिया और बयान बदलकर बोले—”मैं तो स्कूल के आधिकारिक काम से गया था।” सवाल बड़ा ये हैं कि क्या अब स्कूलों की पढ़ाई का जिम्मा छोड़ अध्यापकों को नेताओं की आवभगत और मंच संचालन का टेंडर दिया जा रहा है?

​अफसरों के गोलमाल जवाब और बैकडेट में अर्जी?
​मामला सामने आने के बाद महकमे के आकाओं की नींद उड़ गई, और खलबली मच गई लेकिन कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती की स्क्रिप्ट लिखी जाने लगी। जब इस मामले को लेकर हमारी टीम ने प्रिंसिपल साहिबा का पक्ष जान ना चाहा तो ​प्रिंसिपल मोनिका जी ने दिनभर मीडिया का फोन काटना ही मुनासिब समझा। शाम को किसी व्यक्ति से कहलवाया “मैडम बिजी हैं” और अगले दिन फोन ही उठाना बंद कर दिया गया। और आखिरकार अपनी जबाबदेही से पल्ला झाड़ लिया।

जब इस पूरे मामले को लेकर हमारी टीम ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से बात की तो पहले तो ‘अभिज्ञ’ बने रहे, फिर अचानक बोले प्रिंसिपल मेडम से पूछकर बताता हु और थोड़ी देर बाद बोले “मास्टर जी तो उस दिन छुट्टी पर थे।” ये बात प्रिंसिपल मेडम ने मुझे बताई हैं। ऐसा कहकर मीडिया से ही रिश्तेदारी निकालने लगे और बाते करने लगे

जब इस पूरे मामले को लेकर जनमानस शेखावाटी न्यूज के चीफ जर्नलिस्ट आबिद खान ने जिला शिक्षा अधिकारी से पक्ष जान ना चाहा तो ​जिला शिक्षा अधिकारी हरबंश लाल कहते हैं, प्रिंसिपल मोनिका ने मेरा फोन नही उठाया हैं। “BEO से बात हुई है। उनका कहना है मास्टर जी आए थे, फिर छुट्टी लेकर चले गए। जब सवाल रक्षा गया कि सर छुट्टी लेकर नेताओं के प्रोग्राम में जाना कहां तक सही है, वो भी आचार संहिता के चलते तब बोले गाइडलाइन देख लीजिए… जांच करवाता हूं। – हरबंश लाल, जिला शिक्षा अधिकारी

​सूत्रों की मानें तो अब पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है और साहबों को बचाने के लिए ‘बैकडेट में छुट्टी की अर्जी’ गढ़ी जा रही है, ताकि कागजी खानापूर्ति करके पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा सके।

​सरकार में मुलाजिम फिर भी मंच का मोह?
​एक तरफ राज्य सरकार ‘हर घर सुलभ शिक्षा’ का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही नाक के नीचे सरकारी तंत्र के प्यादे विधायको के मंच सजा रहे हैं। नियम-कानून ताक पर हैं, रजिस्टर के दस्तखत सरकारी ढिलाई की गवाही दे रहे हैं और साहब जांच का झुनझुना बजा रहे हैं।

​अब देखना यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी इस ‘एंकर मास्टर’ पर अनुशासन का डंडा चलाते हैं या फिर बैकडेट का वो जादुई पर्चा मास्टर साहब की हर खता को हमेशा की तरह माफ कर देता है! ये देखना होगा

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