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नगर पालिका चुनाव कहीं थड़ी पर बैठे चाय की चुस्कियों के साथ तो कहीं मुख्य बाजारों, मोहल्लों और अनेक वार्डो में चुनावी चर्चा जारी


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नगर पालिका चुनाव कहीं थड़ी पर बैठे चाय की चुस्कियों के साथ तो कहीं मुख्य बाजारों, मोहल्लों और अनेक वार्डो में चुनावी चर्चा जारी

नगर पालिका चुनाव कहीं थड़ी पर बैठे चाय की चुस्कियों के साथ तो कहीं मुख्य बाजारों, मोहल्लों और अनेक वार्डो में चुनावी चर्चा जारी

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : चुनाव आते ही शहरों की राजनीतिक फिजा पूरी तरह बदल जाती है। चाय की थड़ियों से लेकर बंद कमरों तक, सिर्फ और सिर्फ जीत-हार के समीकरणों पर ही चर्चाएं शुरू हो जाती हैं थड़ी की राजनीति सुबह की पहली किरण के साथ ही चाय की थड़ियों पर चुनावी बिसात बिछने लगती है। चाय की चुस्कियों के साथ स्थानीय लोग, बुजुर्ग और युवा उम्मीदवार के गुण-दोषों को तोलने लगते हैं। यहाँ चर्चा एकदम खुली और बेबाक होती है। नाली, सड़क, पानी और सफाई जैसे जमीनी मुद्दे यहाँ की बहसों का मुख्य केंद्र होते हैं। बंद कमरों के समीकरण इसके उलट, असली रणनीतियाँ बंद कमरों में तैयार होती हैं।

यहाँ राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता और चुनावी रणनीतिकार बैठते हैं। इन कमरों में जातिगत समीकरण, रूठे हुए कार्यकर्ताओं को मनाने की योजना और विरोधी के वोट बैंक में सेंध लगाने की बिसात बिछाई जाती है। टिकट वितरण से लेकर प्रचार के बजट तक का फैसला इन्हीं बंद कमरों में गुप्त रूप से होता है।

चुनाव का यह दौर लोकतंत्र के दो अलग-अलग चेहरों को दिखाता है। जहाँ एक तरफ थड़ी पर आम जनता की उम्मीदें और नाराजगी दिखती है, वहीं दूसरी तरफ बंद कमरों में सत्ता हासिल करने की गुणा-भाग चलती है आखिरकार, इन्हीं दोनों के मेल से तय होता है कि शहर के विकास की चाबी किसके हाथ में जाएगी। किस दल का पालिका अध्यक्षता बनेगी

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