खेजड़ा अगुणा स्कूल की नई बिल्डिंग बनाने की मांग:ग्रामीणों ने CBEO को ज्ञापन सौंपा, बोले-11 महीने बाद भी जारी नहीं हुई स्वीकृति
खेजड़ा अगुणा स्कूल की नई बिल्डिंग बनाने की मांग:ग्रामीणों ने CBEO को ज्ञापन सौंपा, बोले-11 महीने बाद भी जारी नहीं हुई स्वीकृति
सरदारशहर : ग्राम खेजड़ा अगुणा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन को गिराए जाने के 11 माह बाद भी नए भवन निर्माण की स्वीकृति जारी नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों और अभिभावकों में असंतोष है। मंगलवार को ग्रामीणों ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) सरदारशहर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और नए भवन की स्वीकृति तत्काल जारी करने की मांग की।
स्टूडेंट्स की पढ़ाई हो रही प्रभावित-ग्रामीण
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर विद्यालय भवन को जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया था। विभागीय प्रक्रिया के बाद, पिछले वर्ष 25 सितंबर को जारी आदेश के आधार पर भवन को गिरा दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन गिराने के बाद नए भवन का निर्माण शुरू होना चाहिए था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से यह भी पूछा कि भवन गिराने से पहले नए भवन की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति सुनिश्चित क्यों नहीं की गई। उन्होंने नए भवन का प्रस्ताव तैयार करने वाले कार्यालय, उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजने की तिथि, वर्तमान में स्वीकृति के लंबित होने का स्तर और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी मांगी।
उन्होंने मांग की कि यदि निरीक्षण, रिपोर्ट तैयार करने, प्रस्ताव भेजने या स्वीकृति प्राप्त करने में किसी अधिकारी की लापरवाही पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने नए भवन की स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू होने की स्पष्ट समय-सीमा भी बताने की मांग की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करेंगे।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने वालों में अशोक कुमार, राकेश खेजड़ा, भादर राम दानोदिया, हंसराज दानोदिया, शिवलाल नई, जीवन राम, नौरंग लाल चौहान, गुलजारी लाल मिरासी, हेमराज दानोदिया, संतलाल सारण, लीलूराम दानोदिया, भंवरलाल चांदेल, बनवारी लाल, जयचंद, शिवलाल, मघाराम, मोहरसिंह, कुंभाराम, महेंद्र कुमार और राजूराम सहित कई ग्रामीण और अभिभावक शामिल थे।
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