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जसरापुर के श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर में रामकथा के पांचवें दिन हृदयानंद महाराज ने सुनाए धनुष महोत्सव व राम-सीता विवाह प्रसंग, सजीव झांकी रही आकर्षण का केंद्र


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जसरापुर के श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर में रामकथा के पांचवें दिन हृदयानंद महाराज ने सुनाए धनुष महोत्सव व राम-सीता विवाह प्रसंग, सजीव झांकी रही आकर्षण का केंद्र

जसरापुर के श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर में रामकथा के पांचवें दिन हृदयानंद महाराज ने सुनाए धनुष महोत्सव व राम-सीता विवाह प्रसंग, सजीव झांकी रही आकर्षण का केंद्र

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : विजेंद्र शर्मा

खेतड़ी : खेतड़ी उपखंड के जसरापुर गांव के श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर में ग्रामवासियों के सहयोग से चल रही रामकथा के पांचवें दिन कथावाचक हृदयानंद महाराज ने धनुष महोत्सव खंडन, लक्ष्मण का क्रोध, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और राम-सीता विवाह प्रसंग विस्तार से सुनाए।

कथावाचक हृदयानंद महाराज ने धनुष महोत्सव प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि माता सीता के स्वयंवर में अनेक राजा-महाराजाओं ने भगवान शिव के धनुष को उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। राजाओं को असफल देखकर राजा जनक निराश हो गए और उन्होंने कहा कि लगता है पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। राजा जनक के इन शब्दों से लक्ष्मण को क्रोध आ गया। लक्ष्मण ने कहा कि रघुवंश में रहते हुए ऐसी बात सुनना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रभु श्रीराम की आज्ञा मिले तो वे इस धनुष को गेंद की तरह उठा सकते हैं।इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम धनुष के पास पहुंचे। श्रीराम ने धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, तभी धनुष भंग हो गया। धनुष भंग होते ही स्वयंवर स्थल जयकारों से गूंज उठा।

धनुष भंग की जानकारी मिलने पर भगवान परशुराम वहां पहुंचे और शिव धनुष के टूटने पर क्रोधित हुए। उन्होंने धनुष तोड़ने वाले के बारे में पूछा। इस दौरान लक्ष्मण और परशुराम के बीच संवाद हुआ। लक्ष्मण ने निर्भीक होकर परशुराम के प्रश्नों का उत्तर दिया। भगवान श्रीराम ने शांत और विनम्र भाव से स्थिति को संभाला। संवाद के दौरान परशुराम को भगवान श्रीराम के स्वरूप का बोध हुआ और उनका क्रोध शांत हो गया।इसके बाद कथावाचक ने राम-सीता विवाह प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग किए जाने के बाद राजा जनक ने अयोध्या में दूत भेजकर राजा दशरथ को विवाह का निमंत्रण दिया।

निमंत्रण मिलने के बाद राजा दशरथ बारात के साथ जनकपुर पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ।राम-सीता विवाह प्रसंग के दौरान सजीव झांकी सजाई गई, जो कथा स्थल पर आकर्षण का केंद्र रही। इसमें भगवान श्रीराम का अभिनय जोया कुमारी और माता सीता का अभिनय अर्पिता कुमारी ने निभाया। श्रद्धालुओं ने राम-सीता का तिलक कर आरती की तथा कन्यादान करते हुए दान-दक्षिणा भेंट की। सजीव झांकी के दौरान कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने राम-सीता के जयकारे लगाए।कथा के इन प्रसंगों का श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ श्रवण किया। कथा के समापन पर आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

इस मौके पर आचार्य योगेश पांडे, राजेश जलन्द्रा, अशोक सेन, रघुवीर योगी, किशोर सिंह बजाड़, प्रहलाद केडिया, लक्ष्य पांडे, अनिल खिंची, जयप्रकाश शुक्ला, महेश संघीयी, किरण देवी, कांता देवी, ललिता केडिया, उषा देवी, सावित्री देवी, मोरली देवी, सुनीता देवी, लाली देवी, परमेश्वरी देवी, कमला देवी, शारदा देवी, लाडो देवी, चंद्रकला देवी, निर्मला देवी, संतोष देवी, सुमन देवी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

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