पार्वती की विदाई पर भावुक हुए श्रद्धालु, श्रोताओं के छलके आंसू
कथा में सुनाया षिव पार्वती के विवाह के साथ विदाई का प्रसंग
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : शहर के झारिया मोरी स्थित मंत्रियों की छतरी में समस्त शिव भक्त साधक परिवार के तत्वावधान में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के साथ विदाई प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया।
कथा वाचक संतोष सागर महाराज ने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप, अटूट श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का मार्ग अपनाया। उनके तप और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती की विदाई भारतीय संस्कृति में माता-पिता के त्याग, वात्सल्य और बेटी के प्रति स्नेह का अनुपम उदाहरण है।
प्रवचन के दौरान संतोष सागर महाराज ने कहा कि बेटी परिवार की खुशियों का आधार होती है और उसकी विदाई हर माता-पिता के जीवन का सबसे भावुक पल होती है। उन्होंने समाज से बेटियों के सम्मान, संस्कार और शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। कथा के बीच प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
भगवान शिव और माता पार्वती के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। कथा के बाद भगवान शिव एवं माता पार्वती की भव्य आरती गई। क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना करते हुए आयोजकों ने सभी यजमान परिवारों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
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