सीकर में रकम दोगुनी के नाम पर करोड़ों की ठगी:युवाओं को 15 महीने में पैसे दोगुने करने का झांसा, कोर्ट के आदेश पर 2 FIR
सीकर में रकम दोगुनी के नाम पर करोड़ों की ठगी:युवाओं को 15 महीने में पैसे दोगुने करने का झांसा, कोर्ट के आदेश पर 2 FIR
सीकर : सीकर के पालवास चौराहे पर कथित इंटरनेशनल कंपनी का ऑफिस खोलकर 15 महीने में रकम दोगुनी करने और मोटा कमीशन देने का झांसा देकर करोड़ों रुपए हड़पने के 2 मामले सामने आए हैं। ठगी के शिकार युवाओं ने सदर थाने में इस्तगासे के जरिए 2 मुकदमे दर्ज करवाए हैं। पीड़ितों ने 4 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की अलग-अलग धाराओं में मामले दर्ज करवाए हैं। दोनों मामलों की जांच सदर थाने के ASI धनेश कुमार को दी गई है।
सीकर के दौलतपुरा निवासी पीड़ित राजेंद्र कुमार ने जरिए इस्तगासा बताया- मेरी सिहोट बड़ी के भाकरा की ढाणी निवासी सांवरमल से जान-पहचान थी। सांवरमल ने खुद को चिटफंड कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर बताते हुए 15 महीने में पैसा दोगुना करने, विदेशी टूर, लग्जरी गाड़ी और प्लॉट का लालच दिया। सांवरमल की बातों में आकर पीड़ित राजेंद्र ने अगस्त 2022 से नवंबर 2025 के बीच किस्तों में कुल 34 लाख रुपए जमा कर दिए।
आरोपियों ने 30 लाख रुपए हड़प लिए
पीड़ित राजेंद्र ने रकम दोगुनी करवाने के चक्कर में अपनी मां व बहन के सोने के गहने गिरवी रखकर 7.50 लाख रुपए का गोल्ड लोन लिया और भाई की गाड़ी पर टाटा कैपिटल्स से 10.34 लाख रुपए का लोन करवाया। आरोपियों ने 15 लाख रुपए डॉलर में बदलकर सांवरमल की पत्नी सोहनी देवी के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। बाद में आरोपियों ने महज 4 लाख रुपए लौटाए और 30 लाख रुपए हड़प लिए।
दूसरे पीड़ित जेरठी निवासी नितेश कुमार ने बताया- सांवरमल, उसका भाई मनोज कुमार, देवीचंद मील और कथित कंपनी के चीफ मैनेजर संदीप चौधरी ने उसे भी पालवास चौराहे स्थित ऑफिस में बुलाकर बड़े-बड़े बैनर और ब्रोशर दिखाकर जाल में फंसाया। नितेश ने दिसंबर 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच कुल 13 लाख रुपए निवेश किए। इसके लिए उसने आईआईएफएल से करीब 5 लाख रुपए का गोल्ड लोन और आदित्य बिड़ला कैपिटल से 56 हजार रुपए का पर्सनल लोन लिया।
न तो कोई कमीशन दिया और न ही मूल रकम लौटाई
नितेश कुमार ने बताया- आरोपियों ने पीड़ित नितेश को पैसा लेकर डॉलर/क्रिप्टो (USDT) में बदलने का झांसा दिया, लेकिन न तो कोई कमीशन दिया और न ही मूल रकम लौटाई। जनवरी 2026 में जब पीड़ितों को ठगी का अंदेशा हुआ तो वे कंपनी के ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला और सभी आरोपियों के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आए। पीड़ितों का आरोप है कि चारों आरोपी प्रभावशाली हैं और सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं।
चारों आरोपी पत्नियों के नाम से फर्जी एजेंसियां चलाकर लोगों को नेटवर्क मार्केटिंग व चेन सिस्टम के जाल में फंसा रहे थे। आरोप यह भी है कि जब पीड़ितों ने अपने पैसे मांगे तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस अधीक्षक और सदर थाने में शिकायत के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ितों ने जरिए इस्तगासा मुकदमा दर्ज करवाया है।
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