5 दिन बाद भी शांत नहीं हुआ RTO बनाम खाकी का महासंग्राम : कानोता SHO और परिवहन विभाग आमने-सामने, अब ‘काली पट्टी’ से उबलेगा आक्रोश!
वर्दी का रोब या कानून का उल्लंघन? थप्पड़, कथित दुर्व्यवहार और गैर-कानूनी हिरासत के आरोपों से सुलग रही राजधानी, SHO मुनींद्र सिंह को निलंबित करने पर अड़ा RTO महकमा
जयपुर : जब कानून के रक्षक ही आपस में ‘उलझ’ जाएं और व्यवस्था ही सड़कों पर आ खड़ी हो, तो समझ लीजिए कि शासन का इक़बाल किस कदर गंभीर चुनौती के घेरे में है। कानोता पुलिस थाने में 20 जुलाई को घटी तथाकथित घटना के पूरे 5 दिन बीत जाने के बाद भी आरटीओ (परिवहन विभाग) और जयपुर पुलिस के बीच छिड़ी ‘महकमे की जंग’ ठंडी होने का नाम नहीं ले रही है। कानोता थानाधिकारी मुनींद्र सिंह और मोटर वाहन निरीक्षकों के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब केवल दो अधिकारियों की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं रहा, बल्कि ‘खाकी बनाम परिवहन’ के ऐसे बड़े महासंग्राम में तब्दील हो चुका है, जिसने पूरी राज्य प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहाँ परिवहन निरीक्षक संघ पहले से ही कामकाज ठप कर पूरी तरह कार्य बहिष्कार पर डटा हुआ है, वहीं अब इस ‘प्रशासनिक धर्मयुद्ध’ में राजस्थान परिवहन सेवा परिषद के उच्च अधिकारी भी कूद पड़े हैं, जिन्होंने 27 जुलाई (सोमवार) से काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने का आर-पार का अल्टीमेटम दे दिया है।
प्राप्त जानकारी और राजस्थान परिवहन सेवा परिषद द्वारा जारी ज्ञापन (क्रमांक एसपी-35, दिनांक 24.07.2026) के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को मोटर वाहन निरीक्षक नवल किशोर मीणा अपने साथी रामसिंह मीणा के साथ शासकीय व वैधानिक कार्य से कानोता थाने पहुंचे थे। आरोप है कि थाने में तैनात थानाधिकारी मुनींद्र सिंह ने बिना किसी वैध कारण के उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया, सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारकर अपमानित किया और गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया। परिवहन निरीक्षकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब एसएचओ मुनींद्र सिंह पर ऐसे गंभीर आरोप लगे हों; इससे पूर्व अगस्त 2022 में कोटा में नर्सिंग कर्मियों से मारपीट और जुलाई 2026 में ही दो अधिवक्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। आरटीओ संघ की सीधी मांग है कि थानाधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए और पीड़ित निरीक्षक की रिपोर्ट पर आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर कानोता थानाधिकारी मुनींद्र सिंह का अपना अलग ही तर्क और पक्ष सामने आया है। थानाधिकारी का कहना है कि मामला एक दुर्घटना में घायल ट्रक चालक कालूसराम को समय पर अस्पताल पहुंचाने और कानूनी कार्रवाई से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार, जब प्रकरण के सिलसिले में बातचीत की जा रही थी, तो परिवहन निरीक्षक खुद उनसे उलझ गए थे, जिसकी बाकायदा रोजनामचे में प्रविष्टि (एंट्री) की गई है।
पुलिस प्रशासन का दावा है कि दोनों ही पक्षों की ओर से शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। बहरहाल, परिवहन आयुक्त के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं के पूरी तरह बेनतीजा रहने और खोखले आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न होने से पूरे प्रदेश के आरटीओ कार्यालयों में आमजन के कामकाज पूरी तरह ठप पड़े हैं, जिससे जनता परेशान है और सरकारी राजस्व को भी भारी चपत लग रही है। दूसरों का चालान काटने वाला महकमा खुद थाने के चक्कर काटकर न्याय की गुहार लगा रहा है और पर्चे दर्ज करने वाली पुलिस खुद जांच के घेरे में कटघरे में खड़ी है।
अब देखना यह होगा कि 5 दिनों से जारी यह ‘प्रशासनिक नूराकुश्ती’ किसी के निलंबन पर जाकर रुकती है या फिर सोमवार को काली पट्टियों का यह विरोध पूरे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था का पूरी तरह चक्का जाम कर देगा!
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