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181 पर शिकायतें, नोटिस पर नोटिस… फिर भी नहीं रुके अवैध निर्माण!


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181 पर शिकायतें, नोटिस पर नोटिस… फिर भी नहीं रुके अवैध निर्माण!

181 पर शिकायतें भी बेअसर...बीदासर में नगरपालिका की कार्रवाई पर उठे सवाल, कार्यालय से चंद कदम दूर धड़ल्ले से जारी निर्माण कार्य

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नगरपालिका प्रशासन की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आमजन द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों और 181 हेल्पलाइन पर दर्ज परिवादों के बावजूद अवैध निर्माणों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा हालात ऐसे हैं कि नगरपालिका द्वारा जारी किए गए नोटिस भी बेअसर साबित हो रहे हैं और कथित अवैध निर्माण कार्य खुलेआम जारी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि करणी माता मंदिर के पीछे चल रहा एक कथित अवैध निर्माण नगरपालिका कार्यालय से महज 400 से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।

नगरपालिका ने स्वयं इस निर्माण को रोकने के निर्देश जारी किए थे,लेकिन आदेशों के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं सूत्रों के अनुसार संबंधित निर्माणकर्ता को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया था तथा जवाब नहीं देने की स्थिति में निर्माण को सीज करने की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन चेतावनी के बावजूद न तो निर्माण कार्य रुका और न ही किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई सामने आई इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि नोटिस केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगरपालिका के आदेशों की ही खुलेआम अवहेलना हो रही है तो आमजन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों और 181 हेल्पलाइन का क्या औचित्य रह जाता है लोगों का आरोप है कि में कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। .

  • अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अवैध निर्माणकर्ताओं में प्रशासन का कोई भय क्यों नहीं है?
  • क्या अधिकारियों की उदासीनता इसकी वजह है या फिर कुछ लोगों को प्रभावशाली संरक्षण प्राप्त है?
  • यदि नगरपालिका ने निर्माण को अवैध मानते हुए नोटिस जारी किया है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

बढ़ते अवैध निर्माण और उन पर कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी किए जाने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में अवैध निर्माणों की संख्या और बढ़ सकती है तथा नियमों की पालना करने वाले लोगों का प्रशासन से विश्वास उठ सकता है। अब पूरे कस्बे की निगाहें नगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल केवल एक निर्माण का नहीं, बल्कि कानून के राज और प्रशासनिक जवाबदेही का है। देखना यह है कि नगरपालिका नोटिसों की फाइलों से बाहर निकलकर कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा।

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