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मरुस्थलीय क्षेत्र में व्यवसायिक खेती की अपार संभावनाएं : एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति


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मरुस्थलीय क्षेत्र में व्यवसायिक खेती की अपार संभावनाएं : एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति

मरुस्थलीय क्षेत्र में व्यवसायिक खेती की अपार संभावनाएं : एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : चूरू स्थित रिहाई संस्थान परिसर में शनिवार को कृषि वानिकी परियोजना के अंतर्गत बहुमूल्य चंदन की खेती विस्तार हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में किसानों और युवाओं को व्यवसायिक खेती एवं आय वृद्धि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति, जिला अध्यक्ष सिविल राइट सोसायटी चूरू ने कहा कि मरुस्थलीय क्षेत्र में चंदन की खेती की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि भूमि एवं पानी की जांच के बाद इस क्षेत्र में सफेद चंदन की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। उचित देखभाल और तापमान नियंत्रण के साथ किसान 15 वर्षों में लागत से कई गुना अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि चंदन का पौधा परजीवी प्रकृति का होता है, इसलिए इसके साथ सहजन, पपीता जैसे मदर प्लांट लगाना आवश्यक है। शुरुआती तीन वर्षों तक विशेष देखभाल करने पर यह खेती किसानों के लिए आय का स्थायी स्रोत बन सकती है।

कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एनटीएम एएस कोनसे पोर्टल पर पंजीयन प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया गया। साथ ही बेरोजगार युवाओं को विभिन्न निशुल्क कोर्स, प्लेसमेंट एवं व्यवसायिक खेती से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान निदेशक भंवरलाल रुयल ने की। उन्होंने कहा कि संस्थान युवाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। प्रबंध निदेशक फुलाराम एवं सहायक निदेशक सुमन कंवर ने भी प्रशिक्षण सत्रों में मार्गदर्शन दिया।

दो दिवसीय प्रशिक्षण में सरदारशहर, चूरू, रतनगढ़ और तारानगर क्षेत्र के करीब दो दर्जन फील्ड एग्जीक्यूटिव एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान “हर खेत खेजड़ी तोरई अभियान” के तहत वर्षा आधारित बेलदार सब्जियों के निशुल्क बीज भी वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन जीवराज कंसवा लालासर ने किया।

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