सर्कस बना सिस्टम: पैरों में रजिस्टर और ड्यूटी टाइम में सोफे पर लेटे शिक्षा के अधिकारी..’! सीकर के फतेहपुर में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की शर्मनाक रील
फतेहपुर में बेलगाम तंत्र: मर्यादा भूले ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, कैमरा देखते ही बोले-"मैं तो.. मैं तो..अभी-अभी सोया हूँ!"
जनमानस शेखावाटी चीफ जर्नलिस्ट : आबिद खान
फतेहपुर : कहते हैं कि शिक्षा वो शेरनी का दूध है जो पिएगा वो दहाड़ेगा। लेकिन राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर ब्लॉक में शिक्षा विभाग के एक ब्लॉक के शिक्षा अधिकारी ने तो इस कहावत को ही बदल दिया। यहाँ शिक्षा दहाड़ नहीं रही, बल्कि सोफे पर खर्राटे ले रही है! एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री शिक्षा को सुलभ, आसान और वर्ल्ड-क्लास बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर उन्हीं के नुमाइंदे इस पूरे सिस्टम की ‘पोल-खोलने में कसर नही छोड़ रहे हैं।
ताजा मामला फतेहपुर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह का है, जिन्हें देखकर लगता है कि सरकार इन्हें बच्चों का भविष्य संवारने की नहीं, बल्कि ड्यूटी टाइम में सोफे पर रील्स देखने की और लेटने की मोटी पगार दे रही है।
कैमरा देखते ही उड़े होश: “मैं तो… मैं तो… अभी सोया हूँ!
जब जनमानस शेखावाटी न्यूज ‘ की टीम अचानक साहब के दफ्तर पहुंची, तो नजारा किसी फाइव-स्टार होटल के रेस्ट रूम जैसा था। जिम्मेदारी की कुर्सी खाली थी और साहब सरकारी सोफे पर पसरे हुए थे।

साहब के सामने मोबाइल था, आंखों में रील का भूत सवार था, और सबसे शर्मनाक बात जिस ‘उपस्थिति रजिस्टर’ पर पूरे ब्लॉक के शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था का जिम्मा होता है, वो साहब के पैरों में पड़ा था! माता सरस्वती के इस मंदिर में ज्ञान के दस्तावेज को पैरों तले रौंदा जा रहा था।
जैसे ही कैमरे की फ्लैश लाइट साहब के चेहरे पर पड़ी, रील का नशा हिरन हो गया। हड़बड़ाहट ऐसी कि जुबान लड़खड़ाने लगी—”मैं तो… मैं तो… मैं तो अभी-अभी सोया हूँ।” जब टीम ने पूछा कि साहब ड्यूटी टाइम में रील देख रहे हो? पैरो में रजिस्टर हैं। तो बगलें झांकते हुए बोले-“नहीं-नहीं, मैं तो वीडियो कॉल पर थोड़ा बिजी था।” आनन-फानन में साहब ने सोफा छोड़ा और अपनी सरकारी कुर्सी पर ऐसे जा बैठे मानो बड़े सदाचारी हों।

बड़ा सवाल: पैरों में रजिस्टर, तो बच्चे क्या सीखेंगे?
यह सिर्फ एक अधिकारी के सोने की बात नहीं है, यह उस मानसिकता की बात है जो हमारी शिक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह चाट रही है।
जिस अधिकारी के कंधों पर पूरी तहसील के नौनिहालों का भविष्य टिका हो, वो अगर मर्यादा भूलकर हाजिरी रजिस्टर को पैरों में रखेगा, तो वो स्कूलों को क्या संस्कार सिखाएगा?
हर महीने की पहली तारीख को जनता के टैक्स के पैसे से मोटी तनख्वाह उठाने वाले ये अधिकारी एसी कमरों में सोफे तोड़ रहे हैं, और गरीब का बच्चा सरकारी स्कूल में बैठकर अच्छी व्यवस्थाओं का इंतजार कर रहा है।
क्या जिला कलेक्टर करेंगे कोई कार्रवाई?
अब सवाल सीकर के जिला कलेक्टर और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी किरण सैनी से है:
जिला कलेक्टर महोदय: क्या फतेहपुर में अधिकारियों की इतनी मनमर्जी चल रही है कि उन्हें न तो नियमों का खौफ है और न ही पद की गरिमा का? क्या आपकी मॉनिटरिंग सिर्फ कागजी बैठकों तक सीमित है, या इस लापरवाह तंत्र पर आपका कोई प्रशासनिक हंटर भी चलेगा?
क्या मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी जी चलाएंगे कानून का डंडा? या होगी लीपापोती:
आपकी मॉनिटरिंग में एक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हाजिरी रजिस्टर को पैरों में रखकर सोफे पर लेटकर रील देख रहा है।
क्या आपको इस बात की भनक नहीं है, या फिर “सब चलता है” वाला रवैया अपनाकर आंखें मूंद ली गई हैं?
शिक्षा मंत्री जी! क्या इन ‘रीलबाज’ साहब पर चलेगी चाबुक?
जयपुर के वातानुकूलित कमरों में बैठकर बेहतर शिक्षा के दावे करना बहुत आसान है शिक्षा मंत्री जी! आपकी नीतियां अच्छी हैं, लेकिन फतेहपुर के ये लाइव दृश्य आपके दावों की धज्जियां उड़ाने में कसर नही छोड़ रहे हैं।
जनता पूछ रही है कि क्या इन ‘सोफे वाले साहब’ पर कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी? या फिर रसूख के रजाई-गद्दे के नीचे इस मामले को भी दबा दिया जाएगा? अगर ऐसे अधिकारियों पर तुरंत गाज नहीं गिरी, तो समझ लीजिएगा कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है और अधिकारी अपनी मनमर्जी के मालिक!
फतेहपुर की जनता देख रही है… अब देखना यह है कि सरकार के इस सिस्टम की पोल कार्रवाई में बदलती है या साहब फिर सोफे पर रील स्क्रॉल करने में मगन हो जाते हैं!
ये देखना होगा
जब हमारी टीम ने जिम्मेदारों से बात की तो
इनका ये कहना था

मुझे अभी अभी आपके फोटो भेजने से पता चला हैं मेने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र जी को कॉल किया तो उन्होंने कहा हैं मेरे पैरो में दर्द हो रहा था इसलिए थोड़ा सा लेटा था जांच करवाकर दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जायेगी। रजिस्टर की बात पर शिक्षा अधिकारी किरण सैनी ने कहा कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने कहा हैं कि रजिस्टर पैरो में नही था जबकि फोटो में साफ रजिस्टर पैरो में नजर आ रहा हैं। – किरण सैनी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सीकर
कल 46 डिग्री टेंपरेचर था तो थोड़ा गर्मी ज्यादा होती हैं तो पांच दस मिनट सुस्ता भी लेते हैं। रजिस्टर पैर के नीचे नही था पैर के पास था। मैं लेटा हुआ भी काम कर रहा था शायद आपने देखा नही मेरे हाथ में पैन था सोने की तनख्वाह थोड़ी लेते हैं। कुर्सी खाली थी लेकिन में चेंबर में ही लेटा हुआ था
पत्रकार ने पूछा सर ऑफिस में एसी चल रहा था तो हाई टेंपरेचर वाली गर्मी तो नही थी तो बोले ऐसे ही थक जाते हैं तो थोड़ा सा रेस्ट भी कर लेते हैं। – नरेंद्र सिंह ब्लॉक शिक्षा अधिकारी फतेहपुर सीकर
मेरे समकक्ष ही उनका पद हैं में क्या कह सकता हूं। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी किरण जी हैं। वो हमे जो आदेश देंगे उसी हिसाब से हम जांच कर लेंगे उस वक्त क्या मामला था वो देख लेंगे समय क्या था इनका उस वक्त? – मुकेश कुमार जिला शिक्षा अधिकारी सीकर
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