[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना: इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म – अख्तर खान


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
चूरूटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना: इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म – अख्तर खान

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना: इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म - अख्तर खान

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : चूरू जिला मुख्यालय पर ‌ भाजपा अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष अख्तर खान ने कहा भारत विविधताओं का देश है। यहाँ अलग-अलग धर्म, भाषाएँ, रीति-रिवाज और संस्कृतियाँ होने के बावजूद सदियों से लोग प्रेम और भाईचारे के साथ रहते आए हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत रही है। लेकिन आज के समय में समाज में बढ़ती नफरत और कट्टरता चिंता का विषय बनती जा रही है। छोटी-छोटी बातों को धर्म से जोड़कर लोगों के बीच दूरियाँ पैदा की जा रही हैं, जबकि सच यह है कि हर धर्म इंसानियत, प्रेम और शांति का संदेश देता है।साझा संस्कृति और भाईचारे की परंपरा हमारे देश की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब से रही है। यहाँ मंदिर की घंटियों और मस्जिद की अज़ान में कभी टकराव नहीं था, बल्कि दोनों मिलकर भारत की आत्मा को मजबूत करते थे। होली पर मुस्लिम परिवार रंगों में शामिल होते हैं और ईद पर हिंदू परिवार सेवइयों की मिठास बाँटते हैं। यही हमारी असली संस्कृति है।

आज़ादी की लड़ाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ान जैसे क्रांतिकारियों ने धर्म नहीं, बल्कि देश को सर्वोपरि माना। उनके लिए हिंदू-मुस्लिम एकता ही भारत की शक्ति थी। नफरत नहीं, इंसानियत की जरूरत आज सोशल मीडिया और अफवाहों के कारण समाज में गलतफहमियाँ तेजी से फैलती हैं। लोग बिना सच जाने एक-दूसरे के खिलाफ नफरत फैलाने लगते हैं। हमें समझना होगा कि किसी भी धर्म का उद्देश्य हिंसा या बैर नहीं है।
जब कोई बीमार होता है, दुर्घटना में घायल होता है या किसी मुसीबत में फँसता है, तब उसकी मदद करने वाला इंसान पहले इंसान होता है, उसका धर्म बाद में आता है। अस्पताल में खून का रंग एक जैसा होता है, आँसू सबके एक जैसे होते हैं और दर्द भी सबको समान रूप से महसूस होता है। महंगाई, बेरोजगारी, बीमारी और शिक्षा जैसी समस्याएँ किसी का मजहब देखकर नहीं आतीं। इन चुनौतियों का सामना हम तभी कर सकते हैं जब समाज मिल-जुलकर आगे बढ़े।सेवा और करुणा ही सच्ची पूजा भगवद गीता और कुरान दोनों ही प्रेम, दया और सेवा का संदेश देते हैं। भगवान और अल्लाह तक पहुँचने का सबसे आसान रास्ता इंसानियत से होकर गुजरता है। अगर हम सच में अपने धर्म का पालन करना चाहते हैं तो हमें अपने पड़ोसी की मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। त्योहारों की खुशियाँ मिल-बाँटकर मनानी चाहिए।अफवाहों और नफरत फैलाने वाली बातों से दूर रहना चाहिए।बच्चों को प्रेम, भाईचारे और सम्मान की शिक्षा देनी चाहिए।
आने वाली पीढ़ी के लिए जिम्मेदारी समाज में बढ़ती कटुता का सबसे बुरा असर बच्चों और युवाओं पर पड़ता है। यदि हम उन्हें नफरत का माहौल देंगे तो वे भी विभाजन और हिंसा की राह पर चल पड़ेंगे। लेकिन यदि हम उन्हें एकता, सहयोग और भाईचारे का वातावरण देंगे तो वे एक मजबूत और बेहतर भारत का निर्माण करेंगे। आज जरूरत इस बात की है कि हम धर्म के नाम पर लड़ने के बजाय देश और समाज के विकास के लिए साथ खड़े हों। एक-दूसरे के दुख-दर्द को समझें और मिलकर समस्याओं का समाधान निकालें। हमें याद रखना चाहिए कि नफरत की आग सबसे पहले अपने ही घर को जलाती है। झगड़े और विवाद केवल दूरियाँ बढ़ाते हैं, जबकि प्रेम, संवाद और सहयोग समाज को मजबूत बनाते हैं। आइए, हम ऐसा समाज बनाने का संकल्प लें जहाँ इंसान की पहचान उसके धर्म से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संस्कार और इंसानियत से हो। अख्तर अली खान दौलत खानी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा जिला अध्यक्ष चूरू

Related Articles