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डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जॉर्ज मसीह ने किया शुभारम्भ


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डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जॉर्ज मसीह ने किया शुभारम्भ

मानव मूल्यों एवं न्याय के अधीन हो प्रौद्योगिकियों का उपयोग : जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट

जयपुर : डॉ.भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी जयपुर एवं एस.एस. जैन सुबोध लॉ कॉलेज, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में विकसित भारत 2047 के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल जस्टिस थीम पर दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ आज मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायाधीश जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने किया। डॉ भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के सलाहकार जनसंपर्क विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस सम्मेलन के लिए देशभर से लगभग 180 प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाया। इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न प्रतिभागी शिक्षाविद, न्यायविद, शोधार्थी और नीति विशेषज्ञ एक मंच आए और अपने विचारों, शोध निष्कर्षों और कानूनी दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान GALTER एवं डॉ भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, जयपुर के मध्य एक अनुसंधान संबंधित एमओयू भी सम्पन्न हुआ ।

मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायाधीश जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने न्यायपालिका की बदलती भूमिका, संविधान की गरिमा तथा युवा विधि विद्यार्थियों की जिम्मेदारियों पर प्रेरणादायी उद्बोधन देते उन्होंने कहा कि तकनीक को मानव मूल्यों एवं न्याय के अधीन रहकर कार्य करना चाहिए। विशिष्ट मुख्य अतिथि जस्टिस मोहन पीरिस, पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ श्रीलंका ने कहां की अधिवक्ता का कार्य कोई व्यवसाय ना होकर एक कर्तव्यनिष्ठ पैसा है उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक अनुभव साझा करते हुए न्याय व्यवस्था में तकनीकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट किया।

विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. (डॉ.) परमजीत एस. जसवाल ने सामाजिक न्याय एवं एआई गवेर्नेन्स पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समानता, समावेशन एवं न्याय सुनिश्चित करे। सम्मानित अतिथि प्रो. (डॉ.) वी विजय कुमार ने राजनीतिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा भारतीय संवैधानिक मूल्यों पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि एआई मानव का सहायक है, उसका स्वामी नहीं। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों को विकसित भारत 2047 की आधारशिला बताया।

कुलगुरु प्रो.(डॉ.) निष्ठा जसवाल ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विधि शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों तथा समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच संवैधानिक मूल्यों की रक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुशासन एवं संवैधानिकता की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार वर्मा द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया ।

आयोजन के दौरान एक प्लेनरी सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं की भूमिका में प्रो. (डॉ.) कोमल औदीच्य, निदेशक, एमिटी लॉ स्कूल, एमिटी यूनिवर्सिटी, जयपुर; सीए पुष्पेन्द्र दीक्षित, वाइस प्रेसिडेंट एवं ग्लोबल टैक्स हेड, पीवीआर आईनॉक्स ग्रुप; प्रो. अमेर फखौरी, डीन एवं एकेडमिक एडमिनिस्ट्रेटर, अमेरिकन यूनिवर्सिटी, दुबई (यूएई); प्रो. (डॉ.) विजय कुमार सिंह, डीन, फैकल्टी ऑफ लॉ, एसआरएम यूनिवर्सिटी, सोनीपत; तथा डॉ. मनीष सिंघवी, वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, भारत ने अपने विचार रखे।

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