दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरे मजदूर और किसान:चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग, प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरे मजदूर और किसान:चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग, प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
झुंझुनूं : अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को झुंझुनूं जिले में मज़दूरों और किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। जिले के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों को ‘मज़दूर विरोधी’ करार देते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मज़दूरों के कथित शोषण और आंदोलनों के दमन को रोकने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
मज़दूर नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। संगठनों का आरोप है कि न्यूनतम मजदूरी और 8 घंटे काम जैसे बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे मज़दूरों की आवाज़ को कुचला जा रहा है। सरकार संवाद के बजाय मज़दूर नेताओं पर संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज रही है। यह दमनकारी रवैया मज़दूरों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।


प्रमुख मांगें
मज़दूर विरोधी मानी जाने वाली चारों नई श्रम संहिताओं (Labor Codes) को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। ‘फिक्स्ड टर्म’ रोजगार के नाम पर मज़दूरों के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो और ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए। मज़दूर आंदोलनों का दमन बंद किया जाए और गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए। मज़दूरों और उनके प्रतिनिधियों पर दर्ज किए गए सभी ‘झूठे’ मुकदमे वापस लिए जाएं।
इन संगठनों ने दिखाई एकजुटता, इस विरोध प्रदर्शन में जिले के कई प्रमुख संगठनों ने हिस्सा लेकर मज़दूरों के प्रति अपना समर्थन जताया। क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा, झुंझुनूं, क्रांतिकारी किसान यूनियन, झुंझुनूं, शहीद भगत सिंह विचार मंच, झुंझुनूं
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