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जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अयुब खान
पचेरी कलाँ : सिंघानिया विश्वविद्यालय में “भारत-नेपाल संबंध: अतीत से वर्तमान तक” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल के पूर्व उप-मुख्यमंत्री एवं सांसद राजेंद्र सिंह रावल उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने की।
मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंह रावल ने अपने संबोधन में भारत-नेपाल के गहरे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच स्थापत्य, दर्शन, परंपराएं और पारिवारिक रिश्ते गहरी एकता को दर्शाते हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, जल संरक्षण, डिजिटल विकास, रोजगार और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर साझेदारी बढ़ाने का सुझाव दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. मनोज कुमार ने नेपाल की समृद्ध संस्कृति, आतिथ्य और सहयोग की भावना की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत किए जा सकते हैं।

विशिष्ट वक्ता डॉ. रामनिवास मानव ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय वास्तव में “विश्व का विद्यालय” है, जहां विभिन्न देशों के लोग ज्ञान साझा करते हैं। उन्होंने 1816 की सगौली संधि और 1950 की भारत-नेपाल सगौली संधि का उल्लेख किया, जिसमें नेपाल में एक राजा की नियुक्ति का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि नेपाल और नाइजरिया ही दो ऐसे देश हैं जो कभी भी औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं आए। उन्होंने भारत-नेपाल के “रोटी-बेटी” संबंधों और सांस्कृतिक समानताओं को दोनों देशों की मजबूत नींव बताया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि महिपाल सिंह ने कहा कि हिंदी और नेपाली भाषाओं की जड़ संस्कृत में है तथा धार्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर दोनों देशों में गहरा सामंजस्य है। कार्यक्रम में भानुदत्त आचार्य, अधिवक्ता दिनेश कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने भी भारत-नेपाल संबंधों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत परिसर निदेशक प्रो. पी.एस. जस्सल के स्वागत उद्बोधन से हुई, जबकि संचालन रजिस्ट्रार एम.आई. हाशमी ने किया। गोष्ठी में शिक्षा, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर सारगर्भित चर्चा हुई।
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