जनमानस शेखावाटी एक्सक्लूसिव: स्टिंग – स्कूल बस या यमराज का वाहन..? चौधरी घासीराम पब्लिक स्कूल का सुसाइड ओवरटेक, शर्मनाक!
बाल बाल बचे मासूम : 30 बच्चो के घायल होने के बाद भी लापरवाहियां बरकरार, कहां हैं सीकर एसपी की सड़क सुरक्षा क्या खून की नदी बहने के बाद निकालेंगे एसपी शख्त आदेश..?
जनमानस शेखावाटी : अबिद खान
सीकर : एक तरफ प्रशासन ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह ‘ के नाम पर रस्मी फोटो खिंचवाकर सुर्खियां बटोर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर मासूमों की जान का सौदा चंद मिनटों की बचत के लिए आए दिन स्कूली वाहनों द्वारा किया जा रहा है। सीकर में अभी कुछ ही दिन पहले एक स्कूली वाहन के हादसे में 30 बच्चों के घायल होने की खबर से कोहराम मचा था, लेकिन अफसोस कि उस भयानक मंजर से न तो प्रशासन ने कोई सबक लिया, न सीकर पुलिस ने और न ही संवेदनहीन स्कूल प्रबंधनों ने।
हृदयविदारक मंजर: जब मौत से चंद इंच दूर थे मासूम
ताजा मामला नेशनल हाईवे पर फतेहपुर से सीकर के बीच का चौधरी घासीराम पब्लिक स्कूल, लक्ष्मणगढ़ की बस का है। वायरल हो रही तस्वीर और वीडियो इस बात की साफ़ गवाही दे रहे हैं कि यह महज एक ‘ओवरटेक’ नहीं, बल्कि ड्राइवर का एक ‘कातिल फैसला’ था। बस इतनी गलत दिशा में थी कि सामने से आ रही एक सफेद कार को सीधा टकराने से बचने के लिए ड्राइवर को अपनी गाड़ी हाईवे से नीचे कच्चे में उतारनी पड़ी। सोचिए, अगर उस कार का ड्राइवर सूझबूझ नहीं दिखाता या वह कार किसी मोड़ पर होती, तो क्या आज हम फिर किसी बड़े ‘नरसंहार’ हादसे की खबर नहीं पढ़ रहे होते? क्या मासूमों की चीख-पुकार प्रशासन के कानो तक पहुंचने के बाद कोई अभियान चलाया जाएगा।

सवालों के घेरे में ‘चौधरी घासीराम स्कूल’ का प्रबंधन?
स्कूल प्रशासन से सवाल हैं कि आखिर उन्होंने किस आधार पर ऐसे ड्राइवरों को स्टेयरिंग थमाया है? क्या आपके पास चालकों की योग्यता और उनके ट्रैक रिकॉर्ड को जांचने का कोई पैमाना है या आप बस किसी को भी बस की चाबी थमाकर मासूमों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं? जवाबदेही आखिर किसकी है? अगर आज उस कार से टक्कर होती, तो क्या स्कूल प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी लेता या फिर हमेशा की तरह ड्राइवर को ‘बली का बकरा’ बनाकर खुद को बचा लिया जाता?
क्या बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है, या स्कूल पहुंचने का दबाव उनकी सुरक्षा से ज्यादा जरूरी हो गया है?
क्या पुलिस प्रशासन केवल कागजों तक सीमित है ‘
जीरो टॉलरेंस’ नीति ?
क्या पुलिस प्रशासन आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सीकर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से जनता सीधा सवाल कर रही है कि आपकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति धरातल पर क्यों नजर नहीं आ रही? लगातार हो रहे हादसे चीख-चीख कर बता रहे हैं कि सिस्टम में एक बड़ी और जानलेवा चूक हो रही है। बीते दिनो सीकर में 30 बच्चों के लहूलुहान होने के बाद भी ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या केवल एक जांच कमेटी बनाकर फाइलों को अलमारी में बंद कर दिया गया? क्यों ऐसे ‘कातिल’ ड्राइवरों पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) जैसी कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं होता? क्या हर बार इसे महज एक ‘इंसानी गलती’ कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
संवेदना या समाधान
हादसे के बाद प्रशासन का सक्रिय होना और जाँच के आदेश देना अब एक तमाशा’ बन चुका है?। अगर चौधरी घासीराम पब्लिक स्कूल और सीकर पुलिस इस ‘स्कूली जंगलराज’ पर लगाम नहीं लगा सकते, तो यह मान लिया जाएगा कि यहाँ मासूमों की जान की कोई बिसात नहीं है। जनता की मांग स्पष्ट है कि इस बस के ड्राइवर का लाइसेंस तुरंत रद्द हो और उस पर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। स्कूल पर भारी जुर्माना लगाया जाए और सभी ड्राइवरों का ‘मनोवैज्ञानिक टेस्ट’ अनिवार्य हो। अगर अब भी सीकर एसपी ने विशेष टास्क फोर्स गठित कर सख्त आदेश नहीं निकाले, तो अगला हादसा कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और स्कूल की ‘साझा साजिश’ माना जाएगा।
पहले भी मौत बनकर कई बार दौड़ चुके हैं स्कूली कबाड़ वाहन
बीते दिनो मीडिया ने एक के बाद एक कबाड़ बने स्कूली वाहनों पर विशेष स्टिंग किया था जिसमे सीकर के फतेहपुर सहित कई बड़े शहरों में कबाड़ बने स्कूली वाहनों में बच्चो को मौत का सफर करवाया जा रहा था जिसके बाद फतेहपुर कोतवाल महेंद्र मीणा ने एक दो स्कूली वाहन सीज कर कार्रवाई भी की थी मगर बड़ा सवाल यह हैं कि सीकर एसपी ने अब तक मासूमों से जुड़े इतने सेंनसिटिव और गंभीर मामले में कोई विशेष अभियान आखिर क्यों नहीं चलाया ? देखना होगा इस खबर के चलने के बाद सीकर एसपी क्या रुख अपनाते हैं।
इनका कहना है कि
मेरे पास अभी सूचना आई हैं में पता करवाता हूं। ऐसी कोई नेगलीजेंसी हैं तो निश्चित तौर पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बच्चो की सुरक्षा में लापरवाही करने वालो के साथ कोई समझोता नही होगा में खुद इस मामले को देख रहा हूं। – राजा राम थाना प्रभारी लक्ष्मणगढ़ सीकर
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