चारावास गांव में राजस्थानी संस्कृति की अनूठी मिसाल: वर्द्धजन सम्मान समारोह में 29 वरिष्ठ नागरिकों का भव्य सम्मान, युवा पीढ़ी को परंपरा संरक्षण का सशक्त संदेश
चारावास गांव में राजस्थानी संस्कृति की अनूठी मिसाल: वर्द्धजन सम्मान समारोह में 29 वरिष्ठ नागरिकों का भव्य सम्मान, युवा पीढ़ी को परंपरा संरक्षण का सशक्त संदेश
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : विजेन्द्र शर्मा
खेतड़ी : चारावास गांव में राजस्थानी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को बनाए रखने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक पहल की गई। यहां सेवानिवृत्त फौजी रोहतास कुमार पुत्र मेहरचंद चाहर ने हनुमान मंदिर परिसर में ‘वर्द्धजन सम्मान समारोह’ का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमीलाल कल्याण ने की।इस अवसर पर गांव के 29 वरिष्ठ नागरिकों को राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा, जिसमें धोती, कुर्ता और साफा शामिल था, भेंट कर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान संस्कृति के प्रति गौरव और आदर का प्रतीक बना।यह आयोजन केवल वरिष्ठजनों के सम्मान तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य राजस्थानी परंपराओं और वेशभूषा को संरक्षित करने का एक सशक्त संदेश देना भी था। आधुनिकता के इस दौर में जहां पारंपरिक पहनावा और रीति-रिवाज धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, वहीं इस पहल ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रोहतास कुमार ने कहा कि राजस्थानी संस्कृति हमारी पहचान है और इसे जीवित रखना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से अपने बुजुर्गों का सम्मान करने और अपनी संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान किया।
इस समारोह में गांव के सबसे वयोवृद्ध नागरिक अमीलाल कल्याण सहित कुल 29 वरिष्ठ नागरिकों का पारंपरिक तरीके से सम्मान किया गया। सम्मानित होने वालों में बलाराम चाहर, बीरबल बोरान, सुल्तान चाहर, मुकुंदा राम चाहर, नैनाराम चाहर, सुंदरलाल चाहर, चिरंजीलाल माठ, सागरमल शर्मा, रामेश्वर लाल चाहर, ताराचंद मेघवाल, हंसराम दादा, नवरंग, सत्यरूप बांगरवा, रूघाराम चाहर, मक्खन चाहर, उम्मेद बोरान, दाताराम चाहर, गोकुल, गिरधारी चाहर, नवरंग चाहर, मदन, अमर सिंह, तेजमाल माठ, जय नारायण पायल तथा सुल्तान भीछर शामिल थे।कार्यक्रम के दौरान विजेंद्र सिंह चाहर ने रोहतास चाहर को वटवृक्ष का पौधा भेंट कर सम्मानित किया, जो पर्यावरण संरक्षण और परंपरा के संतुलन का संदेश देता है।
बुजुर्गों के चेहरों पर सम्मान पाकर जो खुशी दिखी, वह इस आयोजन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण थी।इस मौके पर मास्टर सुरेंद्र सिंह सरस्वती पब्लिक स्कूल चारावास, कामरेड इंद्राज सिंह बोरान, प्रमेंद्र चाहर (जीएसएस अध्यक्ष), कामरेड होशियार सिंह, होशियार सिंह ठेकेदार, महिपाल सिंह, महेंद्र सिंह ठेकेदार, भोलाराम भीछर, रणधीर सिंह चाहर, शंकर लाल बोरान सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।यह आयोजन न केवल वरिष्ठजनों के सम्मान का माध्यम बना, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को सशक्त करने की दिशा में एक प्रेरणादायक और सराहनीय कदम साबित हुआ
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