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जीणमाता मेले के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब


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जीणमाता मेले के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

जीणमाता मेले के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत

दांतारामगढ़ : सीकर जिले के दांतारामगढ़ क्षेत्र के रलावता ग्राम स्थित जीणमाता मंदिर में चल रहे प्रसिद्ध जीणमाता लक्खी मेले के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से आए भक्तों ने मां जीण भवानी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगी।

सुबह मंगला आरती के साथ ही मेले की रौनक परवान पर पहुंच गई और दिनभर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। आरती के बाद फलों का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर परिसर में श्रद्धालु लंबी कतारों में शांतिपूर्वक दर्शन करते नजर आए और पूरे वातावरण में भक्तिरस घुला रहा।

मंदिर व्यवस्थापक मधुसूदन पुजारी, नंदकिशोर पुजारी, अनिल पुजारी, नंदू सिंह चौहान एवं आनंद पुजारी ने बताया कि मंदिर को कोलकाता और दिल्ली से मंगवाए गए विशेष फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। मां जीण भवानी का शाही पोशाकों से आकर्षक श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में गार्ड एवं स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ करीब 800 से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर पूरी मुस्तैदी बरती जा रही है।

जीणमाता के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं ने आसपास स्थित भंवरावाली माता मंदिर, हर्षनाथ मंदिर एवं पहाड़ी पर स्थित काजल शिखर मंदिर में भी दर्शन किए। ग्राम विकास अधिकारी सुभाष गौरा ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा पार्किंग, सफाई, रोशनी एवं पेयजल सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है।

जात-जड़ूला की परंपरा निभाने पहुंचे श्रद्धालु
मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी कुलदेवी मां जीणमाता के दरबार में जात देने, बच्चों के जड़ूले (मुंडन संस्कार) कराने एवं सवामणी का भोग लगाने पहुंचे। मान्यता के अनुसार विवाह के बाद प्रथम संतान प्राप्ति पर दंपति अपने बच्चे को माता के दरबार में लाकर शीश नवाते हैं और परंपरा अनुसार जात देकर मुंडन संस्कार करवाते हैं।

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