गेहूं पीसने के लिए खोला कट्टा,15 लाख के गहने निकले:किसान से खरीदा था अनाज, किराना व्यापारी ने परिवार को लौटाए
गेहूं पीसने के लिए खोला कट्टा,15 लाख के गहने निकले:किसान से खरीदा था अनाज, किराना व्यापारी ने परिवार को लौटाए
पाली : सफेद जालीदार टोपी लगाए मांगू खान (किराना व्यापारी) स्टील का टिफिन घीसाराम घांची (किसान) की ओर बढ़ाते हैं और कहते हैं- ये है आपकी अमानत। अब इसे आप ही संभालिए। घीसाराम की आंखें छलक उठती हैं। वह एक टक मांगू खान को देख रहे हैं। कहना तो वह बहुत कुछ चाहते हैं, पर मुंह से शब्द नहीं निकल रहा।
एक किसान, जो अनजाने में गेहूं के साथ कट्टे में रखे 15 लाख के कीमती गहने बेच चुका था। जब एक नेकदिल व्यापारी ने उसे उसकी इस कीमती सामान को वापस किया तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह कहानी केवल 15 लाख के गहनों की नहीं, बल्कि दो इंसानों के बीच के उस अटूट भरोसे की है, जो आज भी जिंदा है। इसे जानने-समझने के लिए हम आपको पाली जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर सुमेरपुर के खैरवा गांव ले चलते हैं।
तिजोरी समझ कट्टे में छिपाए थे जेवर, किसान को भनक तक नहीं
खैरवा गांव के रहने वाले घीसाराम घांची की पत्नी ने चोरों के डर से घर के सोने-चांदी के गहने एक टिफिन में भरकर गेहूं के कट्टे के बीच सुरक्षित रख दिए थे। घीसाराम को इस बात का अंदाजा नहीं था कि कट्टे में गेहूं के बीच कुछ और भी रखा हुआ है।
करीब 15 दिन पहले जब घर का अनाज बेचने की बारी आई, तो उन्होंने वही 50-50 किलो के दो कट्टे स्थानीय किराना व्यापारी मांगू खान को बेच दिए। किसान को लगा उसने सिर्फ अपनी फसल बेची है, पर हकीकत में वह अपने परिवार का पूरा भविष्य व्यापारी के गोदाम में छोड़ आया था।

15 मार्च की वो सुबह, जब अनाज के साथ फर्श पर बिखरी ‘लक्ष्मी’ मांगू खान के लिए 15 मार्च का दिन सामान्य था। उन्होंने घर में गेहूं पीसने के लिए जब घीसाराम से खरीदा हुआ कट्टा खोला और उसे खाली किया, तो अनाज के साथ एक भारी टिफिन ‘धप’ से नीचे गिरा। मांगू खान ने जैसे ही टिफिन का ढक्कन हटाया, उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं।
टिफिन सोने के हार, चूड़ियों और चांदी के जेवरों से भरा था। इन गहनों की कीमत बाजार में 15 लाख के आसपास होगी। एक पल के लिए वहां सन्नाटा पसर गया, लेकिन मांगू खान की नीयत नहीं डोली। उन्होंने तुरंत तय किया कि यह किसी की मेहनत की गाढ़ी कमाई है और इसे उसके असली हकदार तक पहुंचना ही चाहिए।

‘गेहूं में समस्या है’ बोलकर बुलाया, फिर थमा दीं खोई हुई खुशियां मांगू खान ने बिना देरी किए घीसाराम को फोन लगाया और बड़ी चतुराई से कहा- भाई, जो गेहूं तुम देकर गए थे, उसमें कुछ समस्या है, जरा तुरंत दुकान पर आ जाओ। बेचारा किसान घबरा गया। उसे लगा शायद गेहूं खराब निकल गया है या कोई और बड़ी गलती हो गई है। वह डरते-सहमे कदमों से दुकान पहुंचा, जहां गांव के कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे।
भावुक पल… कलेजे से टिफिन लगाकर फफक पड़ा किसान जब मांगू खान ने ग्रामीणों की मौजूदगी में वह गहनों से भरा टिफिन घीसाराम के हाथों में सौंपा, तो किसान के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे हकीकत पता चली कि उसकी पत्नी ने अनजाने में यह ‘खजाना’ कट्टे में रख दिया था। वह अपने आंसू नहीं रोक पाया। घीसाराम की आंखों में झलकता वह डर और फिर अचानक मिली राहत देख वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया। किसान ने कहा कि ये गहने उसकी बेटियों के हैं।
ईमानदारी का कोई धर्म नहीं होता खैरवा गांव के ग्रामीणों ने मांगू खान की इस पहल की जमकर सराहना की। यह घटना साबित करती है कि ईमानदारी का कोई धर्म नहीं होता और इंसानियत ही सबसे बड़ा मजहब है।
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