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परसरामपुरा में शीतला अष्टमी पर महिलाओं ने की पूजा-अर्चना:बासी व्यजनों का भोग लगाया, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की


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परसरामपुरा में शीतला अष्टमी पर महिलाओं ने की पूजा-अर्चना:बासी व्यजनों का भोग लगाया, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की

परसरामपुरा में शीतला अष्टमी पर महिलाओं ने की पूजा-अर्चना:बासी व्यजनों का भोग लगाया, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की

परसरामपुरा : परसरामपुरा में शीतला अष्टमी के अवसर पर महिलाओं ने शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया। मुख्य बस स्टैंड स्थित शीतला माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी।

शीतला माता मंदिर के पुजारी जगदीश ने बताया कि अल सुबह से ही बासोड़ा पूजन के लिए भक्तों की भीड़ मंदिर में जुटने लगी थी। श्रद्धालु अपने घरों से नंगे पांव पैदल चलकर गीत गाते हुए माता को विभिन्न प्रकार के बासी पकवानों का भोग लगाने पहुंचे।

पुजारी जगदीश ने यह भी बताया कि माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, इसी कारण इस पर्व को ‘बसोड़ा’ भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि बसोड़ा पर बासी और ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से माता शीतला रोग-व्याधि और संक्रमण से लोगों की रक्षा करती हैं।

शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा भी कहते हैं, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह होली के बाद और चैत्र नवरात्रि के बीच में मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की विशेष पूजा की जाती है और घरों में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि परिवार के सभी सदस्य एक दिन पहले पका हुआ बासी भोजन ही खाते हैं।

परंपराओं का कहना है कि महिलाओं ने अपने परिवार और बच्चों की सुख-समृद्धि, शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की और माता को विभिन्न प्रकार के बासी पकवानों का भोग लगाया।

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