[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

रुपए कमाने नाबालिग 2 सगे भाई हॉस्टल से भागे:किशनगढ़-कुचामन-नागौर में ढूंढा काम; 10 दिन बाद मोबाइल ऑन करते ही मिली लोकेशन


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़राजस्थानराज्यसीकर

रुपए कमाने नाबालिग 2 सगे भाई हॉस्टल से भागे:किशनगढ़-कुचामन-नागौर में ढूंढा काम; 10 दिन बाद मोबाइल ऑन करते ही मिली लोकेशन

रुपए कमाने नाबालिग 2 सगे भाई हॉस्टल से भागे:किशनगढ़-कुचामन-नागौर में ढूंढा काम; 10 दिन बाद मोबाइल ऑन करते ही मिली लोकेशन

सीकर : सीकर में 2 नाबालिग सगे भाई रुपए कमाने के लिए बिना बताए हॉस्टल से चले गए। दोनों एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। दोनों ने किशनगढ़-कुचामन-नागौर पर काम ढूंढने की कोशिश की, लेकिन काम नहीं मिला। दोनों ने स्टेशनों पर रहकर रात गुजारी। 10 दिन बाद जब मोबाइल ऑन किया तो, लोकेशन मिलते ही पुलिस ने इन्हें कुचामन से मंगलवार शाम को डिटेन कर लिया।

दोनों भाइयों की मां की मौत हो चुकी है। वहीं पिता शराब पीने के आदी हैं, इसलिए NGO के जरिए वे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं।

मामला सीकर के उद्योग नगर थाना इलाके का है। SHO राजेश कुमार बुडानिया ने बताया- स्कूल मैनेजमेंट ने थाने में एक मार्च को मामला दर्ज करवाया था। इसमें बताया कि 28 फरवरी को उनके हॉस्टल से 15 और 17 साल के दो नाबालिग भाई लापता हो गए हैं। दोनों हॉस्टल से बिना बताए कहीं चले गए। इनमें 17 साल का स्टूडेंट 11वीं और 15 साल का स्टूडेंट नौवीं क्लास में पढ़ता है।

दोस्तों से मोबाइल का पता चला, पुलिस ने लोकेशन की ट्रेस

पुलिस ने स्टूडेंट के बारे में तमाम जानकारी जुटाना शुरू किया। दोनों स्टूडेंट के साथियों से भी बातचीत की। इस दौरान सामने आया कि इन स्टूडेंट के पास एक मोबाइल फोन है। वह मोबाइल फोन स्विच ऑफ आ रहा था। ऐसे में टेक्निकल सोर्सेज के जरिए स्टूडेंट्स का पता लगाना मुश्किल था।

मां की हो चुकी मौत, पिता शराब पीने के आदी

पुलिस के अनुसार- दोनों लड़कों की मां की मौत करीब 12 साल पहले हो चुकी थी। पिता शराब पीने के आदी हैं। ऐसे में दोनों को समाज कल्याण विभाग के जरिए NGO के हाउस में दाखिल करवा दिया गया। NGO के द्वारा ही इन्हें पढ़ने के लिए सीकर भेजा गया था।

दोनों के एग्जाम 28 फरवरी को पूरे हो गए थे। दोनों भाई पढ़ाई में काफी होशियार हैं। अंदेशा है कि परिवार के साथ नहीं रहने की वजह से बच्चों को लगता था कि उन्हें रुपए कमाकर ही सब कुछ करना है। इसलिए दोनों ने एक साथ हॉस्टल छोड़ने का मन बनाया।

दोनों 28 फरवरी को हॉस्टल छोड़कर ट्रेन से किशनगढ़ पहुंच गए। यहां उन्होंने कई जगह काम की तलाश की, लेकिन उन्हें काम नहीं मिला। दोनों लड़कों के पास कुछ ही रुपए थे। इनमें केवल ट्रेन का किराया और खाना ही हो सकता था। ऐसे में कई जगह इन लोगों ने मदद भी मांगी।

पहले किशनगढ़ फिर नागौर, कुचामन में काम के लिए गए

किशनगढ़ में दोनों भाइयों को जब काम नहीं मिला तो वे काम की तलाश में नागौर आ गए। यहां भी उन्हें कोई काम नहीं मिला। आखिर में दोनों कुचामन चले गए। दोनों लड़कों ने कुचामन जिले में अपना मोबाइल कुछ देर के लिए ऑन किया। जैसे ही पुलिस को इसका पता लगा तो पुलिस टीम वहां गई। यहीं से दोनों को डिटेन किया गया।

SHO राजेश कुमार बुडानिया ने कहा- परिजनों के साथ समाज के हर आदमी की जिम्मेदारी है कि वे स्टूडेंट्स को मोटिवेट करते रहें। ताकि वे कोई गलत कदम नही उठाएं।

Related Articles