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खेतड़ी में आठ मुख्य स्थानों पर होलिका दहन:रंगोत्सव की धूम, महिलाओं ने की सुख-समृद्धि की कामना


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खेतड़ी में आठ मुख्य स्थानों पर होलिका दहन:रंगोत्सव की धूम, महिलाओं ने की सुख-समृद्धि की कामना

खेतड़ी में आठ मुख्य स्थानों पर होलिका दहन:रंगोत्सव की धूम, महिलाओं ने की सुख-समृद्धि की कामना

खेतड़ी : खेतड़ी शहर में होली का पर्व उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। कस्बे के आठ मुख्य स्थानों पर होलिका दहन किया गया, जहां देर रात तक रंगोत्सव की धूम रही। सुबह से ही महिलाएं होलिका स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। उन्होंने मंगल गीत गाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और घर में बने बड़कूले होलिका को अर्पित किए। नवविवाहित जोड़ों ने भी परंपरा निभाते हुए होलिका को धोक लगाई।

इन स्थानों पर हुआ होलिका दहन

कस्बे के मुख्य बाजार, पुरानी जेल का मोहल्ला, अजीत सिंह पार्क के पास, भोपालगढ़, धोबीपाट, शनि मंदिर, माजी शाह का बाग और खैरियों की ढाणी में होलिका दहन किया गया। पंडित अजय सुरोलिया के अनुसार शुभ मुहूर्त में सोमवार रात 1 बजकर 23 मिनट के बाद होलिका दहन संपन्न हुआ।

महिलाओं ने मंगल गीत गाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और घर में बने बड़कूले होलिका को अर्पित किए।
महिलाओं ने मंगल गीत गाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और घर में बने बड़कूले होलिका को अर्पित किए।

बसंत आगमन और आस्था का पर्व

होली का पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए बसंत ऋतु को प्रकट किया था। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला, जिससे कामदेव भस्म हो गए। यह घटना फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हुई मानी जाती है।

इसके अलावा होली नई फसल के आगमन का भी उत्सव है। इस समय विशेष रूप से गेहूं की फसल पककर तैयार होती है। किसान नई फसल का कुछ भाग जलती हुई होलिका को अर्पित कर समृद्धि की कामना करते हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार, प्राप्त अन्न का एक अंश भगवान को अर्पित किया जाता है, इसलिए नई फसल का अन्न होलिका में चढ़ाया जाता है, जिसे यज्ञ के समान माना जाता है।

पूरे शहर में भाईचारे और सौहार्द का वातावरण बना रहा तथा लोगों ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं देकर पर्व की खुशियां साझा कीं।

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