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संस्कृत शिक्षा में हो पदों का समानीकरण, डेपुटेशन समाप्त किया जाए: तिवाड़ी


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संस्कृत शिक्षा में हो पदों का समानीकरण, डेपुटेशन समाप्त किया जाए: तिवाड़ी

विभागीय शिक्षक संघ ने सरकार को भेजा पत्र

जयपुर : राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ ने संस्कृत शिक्षा विभाग में पदों का समानीकरण करने और लंबे समय से चल रहे डेपुटेशन को समाप्त करने की मांग को लेकर सरकार एवं विभाग को पत्र भेजा है। संघ ने नवीन शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले इस पर ठोस निर्णय लेने की मांग की है।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तिवाड़ी (मऊ) ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद पदों का समानीकरण नहीं होने से छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बिगड़ रहा है। प्रदेश में कहीं एक ही पद पर दो से तीन कार्मिक कार्यरत हैं, तो दूसरी ओर 503 संस्कृत विद्यालय शिक्षकविहीन या एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण बीकानेर संभाग में वर्ष 2023 में स्वीकृत दो नए और दो क्रमोन्नत संस्कृत विद्यालय शुरू नहीं हो सके। वहीं कई शिक्षक लंबे समय से विभिन्न कार्यालयों और विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था के नाम पर डेपुटेशन पर कार्यरत हैं, जिससे मूल विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

संघ का दावा है कि इस अव्यवस्था के कारण पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों में नामांकन में 42,407 की कमी आई है। लगातार नकारात्मक खबरों से सरकार और विभाग की छवि भी प्रभावित हो रही है।

प्रदेश महामंत्री दयाल सिंह काजला ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षा सचिव, उप सचिव एवं विभागीय आयुक्त को स्मरण पत्र भेजकर शीघ्र पद समानीकरण करने तथा डेपुटेशन पर कार्यरत शिक्षकों को मूल विद्यालयों में भेजने की मांग की गई है।

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