‘साइबर ठगी हो जाए तो गोल्डन आवर सबसे महत्वपूर्ण’:बोले- तुरंत 1930 पर कॉल करें, बचने का उपाय सिर्फ जागरूकता
'साइबर ठगी हो जाए तो गोल्डन आवर सबसे महत्वपूर्ण':बोले- तुरंत 1930 पर कॉल करें, बचने का उपाय सिर्फ जागरूकता
झुंझुनूं : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), झुंझुनूं के सभागार में एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला एवं सेशन न्यायाधीश दीपा गुर्जर ने कहा कि आज के डिजिटल युग में अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगा रहे हैं। साइबर ठगी से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका जागरूकता है।
न्यायाधीश गुर्जर ने बताया कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। उन्होंने ठगी के बाद गोल्डन आवर के बारे में भी जागरूक किया। अपना OTP (वन टाइम पासवर्ड) कभी भी किसी के साथ साझा न करें, चाहे फोन करने वाला खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए।संदिग्ध फोन कॉल्स और लुभावने ऑफर्स से हमेशा सतर्क रहें।
साइबर अपराध हो जाए तो क्या करें
प्राधिकरण के सचिव महेंद्र सोलंकी ने कानूनी पहलुओं और आपातकालीन उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय तत्काल कदम उठाने चाहिए।
गोल्डन आवर बहुत महत्वपूर्ण
साइबर अपराध होने की स्थिति में ‘गोल्डन आवर’ (शुरुआती समय) बहुत महत्वपूर्ण होता है। ठगी होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। इसके साथ ही www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते अपराधी के बैंक खाते को फ्रीज करवाया जा सके।
इस कार्यक्रम में साइबर क्राइम सेल के प्रभारी ने भी तकनीकी बारीकियों की जानकारी दी और बताया कि किस तरह सोशल मीडिया प्रोफाइल को सुरक्षित रखा जा सकता है। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।
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