चिड़ावा SDH में डॉक्टरों की तत्परता से बची महिला की जान
ओपीडी में हार्ट अटैक आने पर सीपीआर देकर महिला को नया जीवन
चिड़ावा : समय पर दी गई सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) ने एक महिला की जान बचाकर यह साबित कर दिया कि आपात स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा कितनी जीवनरक्षक होती है। यह मामला चिड़ावा उप जिला अस्पताल की ओपीडी का है, जहां डॉक्टरों की सजगता और त्वरित निर्णय से एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार नेपाल निवासी 40 वर्षीय रोशनी देवी चूंगी नाका क्षेत्र के पास एक मकान में घरेलू काम करती हैं। सोमवार को काम के दौरान उन्हें अचानक सीने में दर्द हुआ, जिसके बाद वे परामर्श के लिए चिड़ावा उप जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचीं। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। महिला कुर्सी पर बैठे-बैठे अचेत होकर गिर पड़ी।
उस समय ओपीडी में मौजूद पीएमओ डॉ. नितेश जांगिड़ और चिकित्सक डॉ. भानु प्रकाश की नजर महिला पर पड़ी। दोनों डॉक्टर तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए महिला को सीपीआर देना शुरू किया। डॉक्टरों की तत्परता रंग लाई और कुछ ही पलों में महिला की सांसें दोबारा चलने लगीं। इसके बाद महिला को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर आगे का उपचार शुरू किया गया। फिलहाल महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है।
पहले 4–5 मिनट होते हैं सबसे अहम – डॉ. जांगिड़
उप जिला अस्पताल चिड़ावा के पीएमओ डॉ. नितेश जांगिड़ ने बताया कि सीपीआर एक आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीक है, जो तब दी जाती है जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन बंद हो जाती है। इसमें छाती पर नियंत्रित दबाव और आवश्यकता पड़ने पर कृत्रिम सांस देकर शरीर में रक्त संचार बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामलों में पहले 4–5 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सही समय पर दिया गया सीपीआर जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ा देता है।
स्टाफ को नियमित रूप से दी जाती है सीपीआर की ट्रेनिंग
चिकित्सक डॉ. भानु प्रकाश ने बताया कि अस्पताल के स्टाफ को नियमित रूप से सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और सही कार्रवाई की जा सके। कई बार समय पर दी गई सीपीआर ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर देती है।
जिलेभर में चल रही है सीपीआर जागरूकता मुहिम
सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों में कार्यरत स्टाफ को सीपीआर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। चिड़ावा उप जिला अस्पताल की इस घटना ने प्रशिक्षण के सकारात्मक परिणाम को सामने लाया है। उन्होंने कहा कि आमजन को भी सीपीआर के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है।
पीएमओ डॉ. नितेश जांगिड़ ने बताया कि सीपीआर सीखने के लिए किसी विशेष तकनीकी या शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। कई लोग स्वयं अस्पताल आकर सीपीआर की जानकारी ले रहे हैं। भविष्य में उप जिला अस्पताल की टीम विभिन्न स्थानों पर जाकर भी सीपीआर की जानकारी देकर आमजन को जागरूक करेगी, ताकि किसी भी स्थान पर हार्ट अटैक की स्थिति में समय रहते किसी की जान बचाई जा सके।
महिला के परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि उनकी तत्परता और प्रशिक्षण के कारण आज एक परिवार उजड़ने से बच गया।
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