[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

तकनीकी शिक्षा को पर्यटन व संस्कृति से जोड़ना भविष्य की आवश्यकता : गजेंद्र सिंह शेखावत


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
कोटाटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

तकनीकी शिक्षा को पर्यटन व संस्कृति से जोड़ना भविष्य की आवश्यकता : गजेंद्र सिंह शेखावत

कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी की केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री से शिष्टाचार भेंट

कोटा : राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) कोटा के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से शिष्टाचार भेंटवार्ता की। इस दौरान तकनीकी शिक्षा को भारतीय संस्कृति और पर्यटन से जोड़ने, भविष्य की शिक्षा की आवश्यकताओं तथा नवाचार आधारित शैक्षणिक मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई।

आरटीयू के सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि भेंटवार्ता के दौरान भारतीय शिक्षा ज्ञान परंपरा, पर्यटन क्षेत्र में तकनीक के नवाचारपूर्ण उपयोग, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। यह बैठक विश्वविद्यालय और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के बीच अकादमिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि तकनीकी शिक्षण संस्थान देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन संवर्धन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। तकनीकी शिक्षा को पर्यटन एवं संस्कृति से जोड़ना आज की नहीं बल्कि भविष्य की शिक्षा की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थी न केवल कौशलयुक्त बनेंगे, बल्कि संवेदनशीलता और व्यापक सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी विकसित करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से विद्यार्थी अपनी संस्कृति और विरासत की ओर उन्मुख होंगे और सांस्कृतिक धरोहरों से सीधे जुड़ने का अवसर प्राप्त करेंगे।

भेंटवार्ता के दौरान कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, शोध, भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मंत्री को दी। साथ ही राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के मध्य संभावित सहयोग, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन, विरासत संरक्षण, पर्यटन संवर्धन तथा विद्यार्थियों के लिए नवीन शैक्षणिक अवसरों के सृजन जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

Related Articles