बच्चों में होम-बेस्ड पेरिटोनियल डायलिसिस और शुरुआती स्क्रीनिंग पर जोर
इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर की सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ निशा गौड़ ने प्रेस वार्ता में दी जानकारी
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं : तेजी से बढ़ते किडनी रोगों के बीच मरीजों के लिए इलाज अब पहले से ज्यादा सुरक्षित, आसान और आधुनिक हो गया है। डायलिसिस के नए तरीके, घर पर इलाज की सुविधाएं, बिना बड़े ऑपरेशन के नसों को ठीक करने की तकनीक और किडनी को बचाने वाली नई दवाइयों ने नेफ्रोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी उम्मीद जगाई है। इन्हीं उन्नत उपचार विधियों और वैज्ञानिक प्रगति पर चर्चा के लिए इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर की डॉ निशा गौड़ (वरिष्ठ परामर्शदाता) द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें किडनी देखभाल के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम में मीडिया से विशेष संवाद करते हुए सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. निशा गौड़(सीनियर कंसल्टेंट – नेफ्रोलॉजी, इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर ने किडनी रोगों में आई नई उपचार विधियों पर विस्तार से जानकारी दी।
किडनी फेल्योर से पीड़ित बच्चों के लिए अब पेरिटोनियल डायलिसिस –
डॉ. निशा ने बताया कि किडनी फेल्योर से पीड़ित बच्चों के इलाज में अब पेरिटोनियल डायलिसिस को प्राथमिक और सुविधाजनक उपचार के रूप में अपनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह विधि अस्पताल-केंद्रित इलाज के बजाय घर पर ही सुरक्षित रूप से की जा सकती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, खेल और पारिवारिक जीवन कम प्रभावित होता है। कई परिवार रात में मशीन चलाकर उपचार देते हैं, ताकि बच्चा सोते-सोते ही थेरेपी ले सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका न केवल चिकित्सकीय रूप से प्रभावी है, बल्कि माता-पिता को मानसिक राहत भी देता है क्योंकि बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत कम हो जाती है। प्रशिक्षित अभिभावक घर पर ही देखभाल कर सकते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा भी घटता है। इसी कारण पेरिटोनियल डायलिसिस को बच्चों के लिए बेहतर होम-बेस्ड ट्रीटमेंट माना जा रहा है।
सीकेडी की रोकथाम के लिए डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की जल्दी स्क्रीनिंग आवश्यक –
इसके साथ ही क्रॉनिक किडनी डिजीज की रोकथाम के लिए डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की जल्दी स्क्रीनिंग पर जोर दिया जा रहा है। डॉ. निशा बताती हैं कि डायबिटीज के 30-40 प्रतिशत मरीजों में आगे चलकर किडनी प्रॉब्लम विकसित हो सकती है, इसलिए समय पर डायबिटीज टेस्ट और ब्लड प्रेशर चेक अनिवार्य हैं। इसके अलावा यूरिन टेस्ट और नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी मानी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती पहचान से कई मरीजों को डायलिसिस तक पहुंचने से बचाया जा सकता है। संतुलित आहार, कम नमक, नियमित व्यायाम और समय पर दवाइयां लेने से किडनी पर दबाव घटता है। इस तरह अर्ली स्क्रीनिंग भविष्य में किडनी सुरक्षा का मजबूत कवच बन रही है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि समय पर जांच, सही उपचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किडनी रोगियों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।
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