[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

झुंझुनूं की सड़कें बन रहीं ‘डॉग जोन’:एक साल में 2578 डॉग बाइट केस, 835 बच्चे घायल; बाइक सवार सबसे ज्यादा निशाने पर


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

झुंझुनूं की सड़कें बन रहीं ‘डॉग जोन’:एक साल में 2578 डॉग बाइट केस, 835 बच्चे घायल; बाइक सवार सबसे ज्यादा निशाने पर

झुंझुनूं की सड़कें बन रहीं 'डॉग जोन':एक साल में 2578 डॉग बाइट केस, 835 बच्चे घायल; बाइक सवार सबसे ज्यादा निशाने पर

झुंझुनूं : झुंझुनूं शहर आवारा कुत्तों के खौफ में जी रहा है। सड़कों पर निकलना आमजन के लिए चुनौती बन गया है। जगह-जगह कुत्तों के झुंड राहगीरों पर टूट पड़ते हैं, जबकि बाइक सवारों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। अचानक हमलों में कई लोग गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं।

राजकीय बीडीके अस्पताल के आंकड़े हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं। वर्ष 2025 में अब तक डॉग बाइट के 2578 मामले सामने आए हैं, जिनमें 835 बच्चे शामिल हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में चिंताजनक रूप से ज्यादा है।

दिसंबर में बढ़ा खतरा, सालभर बनी रही परेशानी

बीडीके अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, सिर्फ दिसंबर महीने में ही 300 से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने से घायल होकर इलाज के लिए पहुंचे। पूरे वर्ष की तुलना करें तो 2024 की अपेक्षा करीब 400 अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या अब झुंझुनूं की सबसे बड़ी शहरी समस्या बन चुकी है।

रात में बाइक सवार, सुबह-शाम राहगीर निशाने पर

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुत्ते खासकर रात के समय बाइक सवारों पर अचानक हमला करते हैं। सुबह और शाम के वक्त ये झुंड बनाकर स्कूल जाते बच्चों, टहलने निकले लोगों और राहगीरों पर झपट पड़ते हैं। कई वार्डों में हालात इतने खराब हैं कि शाम ढलते ही लोग घरों में सिमट जाते हैं।

झुंझुनूं में बच्चे को काटने के लिए उसका पीछा करता कुत्तों का झुंड
झुंझुनूं में बच्चे को काटने के लिए उसका पीछा करता कुत्तों का झुंड

हॉटस्पॉट बने शहर के प्रमुख इलाके

शहर के कई व्यस्त इलाके अब ‘डॉग जोन’ में तब्दील हो चुके हैं। दो नंबर रोड, स्टेशन मार्ग, चूरू मार्ग, हवाई पट्टी क्षेत्र, बीडीके अस्पताल के पीछे, सर्किट हाउस के पास, चूरू बाईपास, रीको इलाका, बाकरा मोड़, टीवीएस शोरूम मोड़, रानी सती मार्ग, मून बाग, रोडवेज बस स्टैंड, मंड्रेला सर्किल और नेहरू सर्किल जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में बाइक सवारों को गिराकर कुत्ते गंभीर चोट पहुंचा रहे हैं।

जुलाई और दिसंबर में सबसे ज्यादा केस

बीडीके अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि जुलाई और दिसंबर में डॉग बाइट के मामले सबसे ज्यादा बढ़े। औसतन हर दिन 8 लोग कुत्तों के हमले से घायल हुए। कुल 2578 मामलों में 1310 पुरुष, 433 महिलाएं, 589 बालक और 246 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें 792 मामले गंभीर श्रेणी के थे, जिनमें खून निकलने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया।

रेस्क्यू सेंटर में नसबंदी अभियान शुरू

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नगर परिषद ने आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए हैं। नगर परिषद परिसर में डॉग रेस्क्यू सेंटर शुरू किया गया है, जहां हिंसक कुत्तों का इलाज और नसबंदी की जा रही है। अब तक 20 से अधिक कुत्तों का उपचार किया गया है, जबकि 22 की नसबंदी हो चुकी है।

नगर परिषद आयुक्त देवीलाल बोचल्या ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों को कुत्तों से मुक्त रखने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इस अभियान पर नगर परिषद सालाना करीब 50 लाख रुपए खर्च करेगी।

बीडीके अस्पताल में डॉग बाइट पीड़ितों के लिए विशेष सुविधा

बीडीके अस्पताल में डॉग बाइट पीड़ितों के लिए वैक्सीन और एंटी-रैबीज सीरम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू ने बताया कि गर्दन या चेहरे जैसे ऊपरी हिस्से पर काटने से रैबीज का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे मामलों में सभी 5 डोज लगवाना जरूरी है। उन्होंने अपील की कि डॉग बाइट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचें, क्योंकि संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

Related Articles