[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

एक चिकित्सक ने 40 हजार वसूले, दूसरे ने आंख निकाली, तीसरे और चौथे ने की प्रमाण पत्र में हेराफेरी


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
चूरूटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

एक चिकित्सक ने 40 हजार वसूले, दूसरे ने आंख निकाली, तीसरे और चौथे ने की प्रमाण पत्र में हेराफेरी

17 साल बाद दिव्यांग की पेंशन बंद, चिकित्सा विभाग पर गंभीर आरोप

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय चूरू से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। 62 वर्षीय जाकिर पुत्र कासम काजी, निवासी वार्ड नंबर 15 चूरू ने चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि एक डॉक्टर ने उनसे 40 हजार रुपए वसूले, दूसरे ने आंख निकाल दी, जबकि तीसरे और चौथे डॉक्टरों ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र में हेराफेरी कर दी। इसके चलते उनकी 17 साल से मिल रही दिव्यांग पेंशन चार माह पहले बंद कर दी गई।

इलाज के नाम पर वसूली, फिर आंख भी गई

पीड़ित जाकिर काजी ने बताया कि वर्ष 2006 में दिवाली के दिन उनकी आंख में कुछ गिर गया था। इलाज के लिए वे जयपुर गए, जहां डॉक्टर इंदु अरोड़ा ने उपचार के नाम पर 40 हजार रुपए ले लिए, लेकिन आंख ठीक नहीं हुई। बाद में और पैसे मांगे गए, तो वे चूरू के आंखों के अस्पताल पहुंचे।

चूरू में डॉक्टर माथुर को जयपुर की पर्चियां दिखाई गईं। आरोप है कि डॉक्टर माथुर ने डॉक्टर इंदु अरोड़ा से बातचीत के बाद कोई दवा नहीं दी और प्रभावित आंख को ही निकाल दिया। जाकिर काजी का कहना है कि वह गरीब था, रोने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं था, किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।

2008 में शुरू हुई थी पेंशन

वर्ष 2008 में भाजपा नेता पंकज गुप्ता के प्रयासों से जाकिर काजी की दिव्यांग पेंशन शुरू हुई। उस समय चिकित्सा प्रमाण पत्र में 40 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज की गई थी और तब से लगातार पेंशन मिल रही थी।

प्रमाण पत्र बदला, पेंशन बंद

चार माह पहले आंखों के अस्पताल के डॉक्टर सुधीर और डॉक्टर सुनील ने दिव्यांगता का नया प्रमाण पत्र जारी करते हुए 30 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज कर दी, जबकि पुराने प्रमाण पत्र में 40 प्रतिशत दर्शाया गया था। पीड़ित का आरोप है कि पुराने दस्तावेज दिखाने के बावजूद डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया और सरकारी आदेश का हवाला देते हुए पेंशन बंद करवा दी।

“अधिकारी सुनते नहीं, उल्टे हंसते हैं”

जाकिर काजी का कहना है कि वह कई बार अधिकारियों के पास गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टे उसे अपमानित किया गया। यह पूरा मामला चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों के दामन पर दाग है।

सरकार को बदनाम करने की साजिश?

जिस नेता के प्रयासों से पेंशन शुरू हुई थी, वे वर्तमान में सत्ताधारी पार्टी भाजपा के चौथी बार प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं। सवाल यह उठता है कि सरकार ऐसा आदेश कैसे दे सकती है, जिससे किसी दिव्यांग की वर्षों पुरानी पेंशन बंद हो जाए। पीड़ित का आरोप है कि यह सब उसे परेशान कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश है।

उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

पीड़ित ने मांग की है कि संबंधित उच्च अधिकारी स्वयं मामले का संज्ञान लें, जांच कराएं और न्याय दिलाते हुए उसकी दिव्यांग पेंशन पुनः शुरू की जाए। यदि चूरू प्रशासन समय रहते कार्रवाई कर दे तो पीड़ित को दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।

Related Articles