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फर्जी अधिकारी बनकर 91 लाख की ठगी:नौकरी दिलाने के नाम पर 9 युवकों को बनाया शिकार, तीन साल से फरार मुख्य आरोपी गिरफ्तार


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फर्जी अधिकारी बनकर 91 लाख की ठगी:नौकरी दिलाने के नाम पर 9 युवकों को बनाया शिकार, तीन साल से फरार मुख्य आरोपी गिरफ्तार

फर्जी अधिकारी बनकर 91 लाख की ठगी:नौकरी दिलाने के नाम पर 9 युवकों को बनाया शिकार, तीन साल से फरार मुख्य आरोपी गिरफ्तार

गुढ़ागौड़जी : नौकरी दिलाने के नाम पर 91 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले में तीन साल से फरार चल रहे वांछित आरोपी स्वार्थमल देवठिया को पुलिस ने सोमवार को देवली टोंक थाने में गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मझाऊ गांव का निवासी है।

फर्जी अधिकारी बनकर वसूली की

देवली थानाधिकारी दौलतराम गुर्जर के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम ने तकनीकी संसाधनों और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी को झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौडज़ी थाना क्षेत्र के मझाऊ गांव से 3 दिसंबर को उसके घर से दबोचा। आरोपी पुलिस की गाड़ी देखकर खेतों की ओर भागा, लेकिन कॉन्स्टेबल दीपक ने साहस दिखाते हुए उसका पीछा किया और उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मझाऊ निवासी 59 वर्षीय स्वार्थमल देवठिया बेटा धुडाराम मेधवंशी के रूप में हुई है। जो अपने गांव मझाऊ में मनभरी देवी महिला महाविद्यालय भी चलाता है। स्वार्थमल देवठिया अपने स्वार्थ के लिए फर्जी अधिकारी बनकर बेरोजगारों को नौकरी लगवाने के लिए बड़ी रकम वसूली थी।

9 युवकों से 91 लाख रुपए की राशि ऐंठी

पुलिस के अनुसार परिवादी लोडक्या लाल रेगर, निवासी कुंचलवाड़ा रोड देवली ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि महिंद्रा फाइनेंस कंपनी में रिकवरी कार्य के दौरान उनका संपर्क आरोपियों से हुआ था। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली व्यक्ति बताकर आरपीएससी और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। रीट, पटवारी और एमईएस सहित विभिन्न परीक्षाओं में चयन कराने के नाम पर कुल 9 युवकों से अलग-अलग समय पर लगभग 91 लाख रुपए की राशि ऐंठी गई। जब किसी भी अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ और पैसे वापस मांगे गए, तो आरोपी टालमटोल कर फरार हो गए। इस मामले में पहले ही एक अन्य आरोपी प्रेमसिंह उर्फ छीतर गुर्जर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसने पूछताछ में खुलासा किया था कि ठगी की गई राशि का बड़ा हिस्सा स्वार्थमल देवठिया को दिया गया था। तभी से स्वार्थमल फरार चल रहा था।

विशेष टीम में सहायक उप निरीक्षक दिलीप सिंह, कॉन्स्टेबल राजाराम और दीपक शामिल थे। पुलिस अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, ठगी की गई राशि और संभावित अन्य पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

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